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वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच गहराता ट्रेड वॉर अब एक ख़तरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025' (Sanctioning Russia Act of 2025) को हरी झंडी दे दी है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 500% तक आयात शुल्क लगाने की शक्ति देता है जो रूस के साथ ऊर्जा व्यापार (विशेष रूप से तेल और यूरेनियम) जारी रखते हैं।
आख़िर क्यों लग सकता है इतना भारी टैरिफ़?
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस क़ानून के ज़रिए उन देशों पर 'अत्यधिक दबाव' (Tremendous Leverage) बनाना चाहते हैं जो रूस के "वॉर मशीन" को आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं।
The US Congress is advancing the Sanctioning Russia Act of 2025, which could allow President Donald Trump to impose tariffs as high as 500% on countries importing Russian oil. India, a major buyer of Russian crude, could face higher trade costs and strained US-India relations.… pic.twitter.com/MXwPB4h3ry
— The Pioneer (@TheDailyPioneer) January 8, 2026
रूस से तेल आयात: भारत अपनी तेल ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से रियायती दरों पर ख़रीद रहा है। अमेरिका का तर्क है कि यह पैसा यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है।
दंडात्मक कदम: अमेरिका ने पहले ही भारतीय सामानों पर 500% तक का टैरिफ़ लगाने की चेतावनी दी थी, और अगस्त 2025 में कुछ शुल्कों को बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया था। अब यह नया क़ानून इसे 500% तक ले जाने का अधिकार देता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
यदि यह 500% टैरिफ़ लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाज़ार पूरी तरह बंद हो सकता है।
इन सेक्टरों पर पड़ेगी मार: रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery), कपड़ा (Textiles), इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं पर इसका सबसे बुरा असर पड़ेगा।
निर्यात में गिरावट: आंकड़ों के मुताबिक़, 2025 के मध्य से अब तक भारतीय निर्यात में पहले ही लगभग 20% की गिरावट दर्ज की गई है। 500% टैरिफ इसे शून्य के क़रीब ला सकता है।
भारत का रुख़: "राष्ट्रीय हित सर्वोपरि"
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई बार साफ़ किया है कि भारत की ऊर्जा नीति उसके राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। भारत ने बार-बार कहा है कि वह किसी भी दबाव में आकर रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा, हालांकि भारत ने अब धीरे-धीरे अमेरिका से भी तेल और गैस का आयात बढ़ाना शुरू कर दिया है।
कोबाल्ट और रणनीतिक खनिज (Strategic Minerals)
एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अमेरिका की नज़र रूस के साथ भारत के व्यापार पर ही नहीं, बल्कि चीन के साथ व्यापार पर भी है। इस बिल में उन देशों को भी लक्षित किया गया है जो रूस से यूरेनियम या अन्य रणनीतिक खनिज ख़रीदते हैं।
आगे क्या होगा?
अमेरिकी सीनेट में इस विधेयक पर अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है। यदि यह पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास भारत को "छूट" (Waiver) देने या सीधे टैरिफ़ लगाने का विवेकाधीन अधिकार होगा। विशेषज्ञ इसे ट्रंप की 'नेगोशिएशन तकनीक' का हिस्सा मान रहे हैं ताकि भारत को रूस से दूर कर अमेरिका के पाले में पूरी तरह लाया जा सके।