Tuesday, 13th of January 2026

सेना प्रमुख की पाकिस्तान को सीधी चेतावनी: "ड्रोन घुसपैठ मंज़ूर नहीं, DGMO स्तर पर दर्ज कराया कड़ा विरोध"

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 13th 2026 05:04 PM  |  Updated: January 13th 2026 05:04 PM
सेना प्रमुख की पाकिस्तान को सीधी चेतावनी: "ड्रोन घुसपैठ मंज़ूर नहीं, DGMO स्तर पर दर्ज कराया कड़ा विरोध"

सेना प्रमुख की पाकिस्तान को सीधी चेतावनी: "ड्रोन घुसपैठ मंज़ूर नहीं, DGMO स्तर पर दर्ज कराया कड़ा विरोध"

नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आज देश की सुरक्षा स्थिति पर एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को साफ़ संदेश दे दिया है। उन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर और पंजाब सीमा पर देखे गए ड्रोन्स को लेकर गंभीर चिंता जताई और बताया कि इस मुद्दे को सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) स्तर की बातचीत में प्रमुखता से उठाया गया है।

ड्रोन गतिविधियों का विश्लेषण: "डिफेंसिव" थे छोटे ड्रोन

जनरल द्विवेदी ने पिछले तीन दिनों (10, 11 और 12 जनवरी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सीमा पर ड्रोन्स की आवाजाही देखी गई है।

सटीक आंकड़े: उन्होंने बताया कि 10 जनवरी को करीब 6 ड्रोन देखे गए थे, जबकि 11 और 12 जनवरी को 2 से 3 ड्रोन्स की गतिविधि दर्ज की गई।

ड्रोन का प्रकार: सेना प्रमुख के मुताबिक़, ये बहुत छोटे ड्रोन थे जो कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे और अपनी लाइटें जलाकर आ रहे थे।

मक़सद: जनरल द्विवेदी का मानना है कि ये 'डिफेंसिव' ड्रोन थे। इनका उद्देश्य यह जांचना था कि क्या भारतीय सेना की चौकसी में कोई ढिलाई है या कोई ऐसा रास्ता है, जहां से आतंकवादियों की घुसपैठ कराई जा सके।

DGMO स्तर पर दी गई चेतावनी

सेना प्रमुख ने इस बात की पुष्टि की कि आज ही भारत और पाकिस्तान के DGMO (Director General of Military Operations) के बीच बातचीत हुई है।

"हमने उन्हें साफ़ ट रूप से बता दिया है कि यह हमें मंज़ूर नहीं है। ड्रोन की ये गतिविधियां तुरंत रोकी जानी चाहिए। उन्हें 'नेगेटिव' जवाब मिल गया होगा क्योंकि आज हमारी सीमाओं पर ऐसी कोई ढिलाई नहीं है जिसका वे फ़ायदा उठा सकें।"

ऑपरेशन सिंदूर और रॉकेट फोर्स की तैयारी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सेना प्रमुख ने अन्य रक्षा तैयारियों पर भी प्रकाश डाला:

ऑपरेशन सिंदूर: उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन अभी भी जारी है और पश्चिमी मोर्चे पर किसी भी दुस्साहस का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जाएगा।

मिसाइल और रॉकेट फोर्स: सेना अब एक समर्पित 'मिसाइल और रॉकेट फोर्स' तैयार कर रही है, जो भविष्य के युद्धों में भारत की मारक क्षमता को और अधिक सटीक और घातक बनाएगी।

स्वदेशी ड्रोन निर्माण: उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की हर कमांड अब ख़ुद ड्रोन बनाने में सक्षम है और लगभग 5,000 ड्रोन्स का निर्माण किया जा चुका है।

सतर्कता ही सुरक्षा का आधार

जनरल उपेंद्र द्विवेदी के इस बयान से साफ़ है कि भारतीय सेना अब ड्रोन जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए न केवल आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है, बल्कि कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर भी ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए तैयार है।

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