नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा संपन्न कर ली है, जिसने भारत और रूस की 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को एक नई दिशा दी है। यह दौरा यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा थी, जिसने वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच दोनों देशों के रिश्तों की स्थिरता और मज़बूती को रेखांकित किया है।
President Putin’s visit will add vigour to India-Russia ties….@KremlinRussia_E pic.twitter.com/NPUSZKAGgA
— Narendra Modi (@narendramodi) December 5, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों को केवल सैन्य और रक्षा साझेदारी से आगे बढ़ाते हुए बहुआयामी बनाने की रूपरेखा रखी गई।
अब तक क्या-क्या हुआ?
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का नई दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शिखर वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएं हुईं, जो दोनों देशों के सहयोग को अगले दशक तक मज़बूत करेंगी।
मुख्य समझौते और घोषणाएं
16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और चार महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं।
आर्थिक सहयोग:
वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।
2030 इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम के तहत एक विशेष कार्यक्रम शुरू होगा।
जल्द से जल्द मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को साकार करने की दिशा में नए क़दम उठाए जाएंगे।
ई-वीजा सुविधा:
रूसी पर्यटकों को 30 दिनों के लिए ई-वीज़ा और समूह पर्यटन वीजा देने की घोषणा की गई, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
मानव संसाधन:
रूसी उद्योग की जरूरत के मुताबिक भारत से प्रशिक्षित कामगारों की आपूर्ति पर सहमति बनी।
गैर-कानूनी तौर पर श्रमिकों की आवाजाही को रोकने में सहयोग किया जाएगा।
ऊर्जा और कृषि:
पुतिन ने भारत को निर्बाध तेल और गैस की आपूर्ति का आश्वासन दिया।
खाद्य उत्पादों की सुरक्षा व गुणवत्ता में सहयोग से भारत का रूस को निर्यात बढ़ेगा।
भारतीय कंपनी द्वारा रूस में उर्वरक संयंत्र लगाने का रास्ता साफ़ हुआ।
आतंकवाद पर कड़ा रुख़:
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति पर बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी सेना में शामिल भारतीयों का मुद्दा भी उठाया और उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की।
रक्षा और सुरक्षा
रक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर प्रक्रिया जारी रहेगी।
दोनों देशों ने सैन्य तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (2021-2031) को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
रक्षा सौदों के साथ-साथ सह-उत्पादन और सह-नवाचार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना है।
आगे क्या संभावनाएं हैं?
पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, जहां रिश्ते पारंपरिक क्रेता-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़कर गहरे आर्थिक और तकनीकी सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।
व्यापार संतुलन: भारत के लिए एक बड़ी संभावना यह है कि रूस को रसायन, खाद्य, दवा उत्पादों और मशीनरी का निर्यात बढ़ाकर व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
उन्नत रक्षा सहयोग: भारत सुखोई-57 (Su-57) स्टेल्थ फाइटर जेट्स और S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे उन्नत रक्षा प्रणालियों पर भविष्य में सहयोग की उम्मीद कर रहा है।
अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा: रूस द्वारा भारत में छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर बनाने में मदद करने की पेशकश और RD-191M सेमीक्रायोजेनिक रॉकेट इंजन की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम (GSLV Mk3/LVM3) के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है।
क्या उम्मीदें हैं?
इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों की स्थिरता और निरंतरता की वैश्विक उम्मीदें मज़बूत हुई हैं।
कूटनीतिक: वैश्विक मंचों, विशेषकर अफ़ग़ानिस्तान और आतंकवाद पर क़रीबी समन्वय।
आर्थिक: द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब तक पहुंचाना और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ FTA।
रक्षा: एस-400 की डिलीवरी पूरी करना और उन्नत प्रणालियों (जैसे Su-57) पर भविष्य की बातचीत।
ऊर्जा: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में सहयोग और तेल-गैस की विश्वसनीय आपूर्ति।
प्रधानमंत्री मोदी ने ठीक ही कहा कि दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन भारत-रूस की दोस्ती "ध्रुव तारे की तरह स्थिर और मार्गदर्शक रही है।" पुतिन के इस दौरे ने इस भरोसे और सम्मान पर बने रिश्ते को और मजबूत किया है, साथ ही यह संदेश दिया है कि नई दिल्ली अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त के साथ रिश्तों को हर हाल में प्राथमिकता देती रहेगी।