कुलदीप सेंगर की सज़ा बढ़ाने की मांग वाली याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के पास भेज दिया। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप सभी संबंधित मामलों को एक विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध मुख्य न्यायाधीश से किया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मंजू जैन की खंडपीठ ने मृतक पीड़िता की बेटी द्वारा दायर शीघ्र सुनवाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ को संदर्भित किया।
अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की गई
याचिकाकर्ता ने कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत में मौत के मामले में दी गई 10 वर्ष की सज़ा बढ़ाने की मांग की है। वह इस मामले में 10 साल की सज़ा काट रहे हैं। मामले को निर्देश के लिए 19 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। उन्नाव रेप पीड़िता की ओर से अधिवक्ता महमूद प्राचा पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि सज़ा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई खंडपीठ द्वारा की जानी चाहिए, क्योंकि यह हत्या का मामला है और इसमें आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है।
वहीं, सीबीआई की ओर से अधिवक्ता अनुराधा भारद्वाज पेश हुईं। उन्होंने कहा कि याचिका की सुनवाई उसकी ग्राह्यता (मेंटेनेबिलिटी) तय होने के बाद ही की जानी चाहिए।कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत में मौत के मामले में 10 वर्ष की सज़ा और नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। दोनों मामलों में उसकी अपीलें दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं।
2025 में हिरासत में मौत के मामले में सेंगर की सज़ा पर लगी थी रोक
पीठ ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मामले का निस्तारण तीन महीने के भीतर प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। लेकिन विभिन्न पीठों के समक्ष मामले लंबित होने के कारण तीन महीने के भीतर निर्णय संभव नहीं है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष भेज दिया, ताकि सभी संबंधित मामलों को एक ही पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जा सके।
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।