मेघालय: कोयला खदान में विस्फोट की जांच के लिए SIT गठित, मृतकों की संख्या 27 हुई
शिलांग, मेघालय: मेघालय सरकार पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के माइनसंगट–थांग्सको क्षेत्र में हुई हालिया खनन दुर्घटना की जांच के लिए जांच आयोग अधिनियम के तहत एक न्यायिक जांच आयोग का गठन करने का निर्णय लिया है। इस हादसे में अब तक कम से कम 27 लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “सरकार ने पूर्वी जयंतिया हिल्स के माइनसंगट–थांग्सको (Mynsngat - Thangsko) क्षेत्र में हुई दुखद खनन घटना की जांच के लिए जांच आयोग अधिनियम के तहत एक न्यायिक जांच आयोग गठित करने का निर्णय लिया है।”
हाईकोर्ट ने घटना का संज्ञान लेते हुए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को तलब किया
पूर्वी जयंतिया हिल्स पुलिस ने रविवार को बताया कि 5 फरवरी को हुई अवैध कोयला खनन विस्फोट के बाद चलाया जा रहा खोज और बचाव अभियान अब भी जारी है, जबकि यह मामला फिलहाल हाई कोर्ट के विचाराधीन है। इस मामले में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि हाई कोर्ट ने घटना का संज्ञान लिया है और पूर्वी जयंतिया हिल्स के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया है। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस समय हम ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
कई रैट-होल्स के चलते अंधेरे में शवों को ढूंंढने और सुरक्षित बाहर निकालने में कई मुश्किलें
कई चुनौतियों के बावजूद, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के जवान अब तक थांग्सको क्षेत्र के कोयला खदान से 24 में से 6 शव बरामद करने में सफल रहे हैं। 5 फरवरी को विस्फोट के बाद थांग्सको क्षेत्र की एक अवैध कोयला खदान में कई मजदूर फंस गए थे। NDRF की पहली बटालियन के कमांडेंट HPC कंडारी ने बताया कि रैट-होल माइनिंग की प्रकृति के कारण बचाव कार्य में कई कठिनाइयां आ रही हैं। उन्होंने कहा कि हम पहले भी कोयला खदानों की अन्य घटनाओं में शामिल रहे हैं, जैसे पानी भरने वाली खदानें। लेकिन इस तरह के ऑपरेशन में हम पहली बार हिस्सा ले रहे हैं।
इस खदान की गहराई लगभग 100 फीट है और उसके बाद रैट-होल बने हुए हैं। सबसे बड़ी चुनौती इन रैट-होल्स में है। पहले जहरीली गैसों की आशंका भी थी। खदान की स्थिरता भी एक चुनौती है। अंधेरे में शवों को ढूंढना और सुरक्षित रूप से बाहर निकालना बेहद मुश्किल काम है। वहीं, NDRF की पहली बटालियन के डिप्टी कमांडेंट नृपेन तिवारी ने भी ऑपरेशन के दौरान आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि यह इलाका काफी दूरस्थ है और हादसे के बाद, खदान में फंसे पीड़ितों को छोड़कर बाकी सभी लोग वहां से भाग गए थे।