लखनऊ: गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबज़ादों की शहादत की स्मृति में मनाए जाने वाले 'वीर बाल दिवस' के अवसर पर लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास (5 कालिदास मार्ग) भक्ति के रंगों में सराबोर नज़र आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिख परंपरा के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा प्रकट करते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की अगवानी की और उसे अपने सिर पर धारण कर पूरे सम्मान के साथ सभा स्थल तक लेकर आए।
मुख्यमंत्री का संदेश: "औरंगज़ेब का नाम लेने वाला कोई नहीं, पर हर शहर में गुरुद्वारा है"
जिस दुष्ट औरंगजेब ने गुरु श्री तेग बहादुर जी महाराज को चुनौती दी थी...आज उसका कोई नाम लेने वाला नहीं है... pic.twitter.com/AQAveNREAu
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) December 26, 2025
इस अवसर पर आयोजित कीर्तन समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़े शब्दों में धर्म और राष्ट्र की रक्षा का आह्वान किया। ये रहे सीएम योगी के संदेश के मुख्य बिंदु:
अजेय विरासत की जीत: सीएम योगी ने कहा कि आज इतिहास गवाह है कि साहिबज़ादों को दीवार में चुनवाने वाले क्रूर औरंगज़ेब का नाम लेने वाला कोई नहीं बचा है, जबकि भारत के हर शहर में गुरु साहिब की याद में गुरुद्वारे स्थापित हैं। यह सत्य और धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक है।
इतिहास से सीख: उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि हम सिख गुरुओं के बलिदान से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेंगे, तो भारत को कभी 'काबुल' या 'बांग्लादेश' जैसी स्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने विभाजनकारी शक्तियों से सावधान रहने की अपील की।
साहिबज़ादों का अतुलनीय त्याग: मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि मात्र 7 और 9 वर्ष की आयु में साहिबज़ादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने जिस वीरता का परिचय दिया, वह दुनिया के इतिहास में विरल है। उन्होंने धर्म के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी पर अधर्म के सामने नहीं झुके।
शिक्षा में शामिल होगा इतिहास: सीएम ने घोषणा की कि सिख गुरुओं और साहिबज़ादों की गौरवशाली गाथा को उत्तर प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने असली नायकों के बारे में जान सके।
ये रही कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
श्री गुरु ग्रंथ साहिब का आगमन: मुख्यमंत्री ने पारंपरिक मर्यादा के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को पालकी साहब में आसीन कराया।
शबद कीर्तन और अरदास: पंजाब और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए रागी जत्थों ने गुरुबाणी का पाठ किया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
11,000 सहज पाठ का संकल्प: इस वर्ष के आयोजन में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित विशेष सत्र भी आयोजित किए गए।
लंगर सेवा: मुख्यमंत्री ने स्वयं लंगर में शिरकत की और संगत के साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जो समानता और सेवा के सिख संदेश को चरितार्थ करता है।
'वीर बाल दिवस' (साहिबजादा दिवस) के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में... https://t.co/nfifd2H79A
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) December 26, 2025
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संदेश न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने का एक संकल्प भी था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' घोषित करने का निर्णय साहिबज़ादों के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का एक ऐतिहासिक कार्य है।