GTC News: हिंदी साहित्य की सबसे मौलिक रचनाओं के रचयिता विनोद कुमार शुक्ल अब हमारे बीच नहीं रहे। अपनी जादुई सादगी और शब्दों के अनूठे शिल्प से साधारण को असाधारण बनाने वाले शुक्ल जी पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
अंतिम समय और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
परिजनों के मुताबिक़, शुक्ल जी को सांस लेने में तकलीफ़ की वजह से 2 दिसंबर को रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया था। वे 'इंटरस्टिशियल लंग डिजीज' (ILD) और गंभीर निमोनिया से पीड़ित थे। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था (Multiple Organ Failure), जिसके कारण मंगलवार (23 दिसंबर 2025) शाम उनका देहांत हो गया।
छत्तीसगढ़ के पहले 'ज्ञानपीठ' विजेता
विनोद कुमार शुक्ल का निधन उस समय हुआ है, जब हाल ही में 21 नवंबर 2024 को उन्हें देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा गया था। वे छत्तीसगढ़ के पहले साहित्यकार थे जिन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ। ख़राब स्वास्थ्य के कारण यह सम्मान उन्हें उनके रायपुर स्थित निवास पर ही प्रदान किया गया था।
प्रमुख कृतियां और साहित्यिक योगदान
जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्ल जी ने अपनी रचनाओं से आधुनिक हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
उपन्यास: 'नौकर की कमीज़', 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' (साहित्य अकादमी पुरस्कृत), 'खिलेगा तो देखेंगे'।
कविता संग्रह: 'लगभग जयहिंद', 'वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह', 'सब कुछ होना बचा रहेगा'।
अन्य: उनके उपन्यास 'नौकर की कमीज' पर प्रसिद्ध निर्देशक मणि कौल ने फ़िल्म भी बनाई थी।
शोक संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (Twitter) पर शोक जताते हुए लिखा:
"ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे।"
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
— Narendra Modi (@narendramodi) December 23, 2025
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके लेखन में वंचित समुदायों और साधारण मनुष्य के प्रति जो सहानुभूति थी, वह अद्वितीय थी।
अपनी सहज और सशक्त रचनाओं से गद्य और पद्य को अत्यंत समृद्ध करने वाले रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। पीछे छूट गए तथा हताश हो रहे समुदायों और व्यक्तियों के प्रति संवेदना एवं चिंता का भाव उनके लेखन को विशेष अर्थवत्ता प्रदान करता है। उनके…
— President of India (@rashtrapatibhvn) December 23, 2025
बेशक़ विनोद कुमार शुक्ल का जाना हिंदी साहित्य के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। उन्होंने भाषा को अलंकृत करने के बजाय उसे 'नंगेपन' और 'सादगी' के साथ पेश किया, जो उनकी सबसे बड़ी ताक़त थी।