Friday, 9th of October 2026

दिल्ली दंगे साजिश मामला: उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली ज़मानत

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at:
दिल्ली दंगे साजिश मामला: उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली ज़मानत

दिल्ली दंगे साजिश मामला: उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली ज़मानत

GTC News: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने 5 जनवरी 2026 को अपना फै़सला सुनाया। कोर्ट ने साफ़ किया कि तमाम आरोपी लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन उनकी भूमिकाओं और उनके ख़िलाफ़ मौजूद सबूतों के आधार पर उन्हें एक ही श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। RJD सांसद मनोज झा ने 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका को SC द्वारा खारिज करने पर कहा, "मैं मानता हूं कि एक बात तो स्पष्ट है कि जिन्हें ज़मानत मिली, उन्हें यह बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी। मुझे लगता है कि यह न्यायपालिका को धन्यवाद देने का क्षण है... उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में उम्मीद है कि उन्हें भी जल्द ही न्याय मिलेगा।"

उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को राहत क्यों नहीं?

अदालत ने इन दोनों की ज़मानत याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके ख़िलाफ़ UAPA (गै़रक़ानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत 'प्रथम दृष्टया' (prima facie) मामला बनता है। बेंच ने अपने फै़सले में निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

मुख्य भूमिका: कोर्ट ने माना कि साज़िश रचने, लोगों को जुटाने और रणनीतिक निर्देश देने में ख़ालिद और इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से 'गुणात्मक' रूप से अलग और ज़्यादा गंभीर थी।

साज़िश के सूत्रधार: अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों का हवाला देते हुए कोर्ट ने उन्हें साज़िश का 'प्रमुख सूत्रधार' माना।

राष्ट्रीय सुरक्षा: कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना, बिना ट्रायल के लंबे समय तक हिरासत में रहने के तर्क से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

इन 5 आरोपियों को मिली ज़मानत

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 5 साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद अन्य पांच आरोपियों को कुछ कड़ी शर्तों के साथ ज़मानत दे दी है:

गुलफ़िशा फ़ातिमा

मीरान हैदर

शिफ़ा उर रहमान

मोहम्मद सलीम ख़ान

शादाब अहमद

अदालत ने इनके संदर्भ में कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक़ इनकी भूमिका सहायक प्रकृति की थी और उन्हें ख़ालिद या इमाम के समान स्तर पर नहीं रखा जा सकता। इन पांचों को 12 विशेष शर्तों के अधीन रिहा करने का आदेश दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि (2020 दिल्ली दंगे)

घटना: फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और NRC के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी।

प्रभाव: इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।

आरोप: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आरोप लगाया था कि यह दंगे कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि भारत सरकार को अस्थिर करने और वैश्विक स्तर पर देश की छवि ख़राब करने की एक 'सुनियोजित साज़िश' थी।

दलीलें और देरी पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों (कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी आदि) ने तर्क दिया था कि आरोपी 5 साल से ज़्यादा समय से बिना ट्रायल के जेल में हैं, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि आरोपियों ने ख़ुद अलग-अलग आवेदन दायर करके ट्रायल में देरी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी जोड़ा कि "जेल नहीं, बल्कि बेल" का सामान्य नियम UAPA जैसे विशेष क़ानूनों के तहत सीमित हो जाता है, जहां अदालत को केवल यह देखना होता है कि क्या आरोप प्रथम दृष्टया सच प्रतीत होते हैं।

अगला क़दम: ज़मानत मिलने वाले पांचों आरोपी अदालती कार्यवाही पूरी होने के बाद जेल से बाहर आ सकेंगे। वहीं, उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के पास इस फै़सले के ख़िलाफ़ 'पुनर्विचार याचिका' (Review Petition) दायर करने का विकल्प शेष है।