नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं, जो आठ दशक पुरानी भारत-रूस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक मज़बूत संकेत है। जटिल भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हो रहा यह 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन पूरी दुनिया की निगाहों में है।
Addressing the joint press meet with President Putin.@KremlinRussia_E https://t.co/ECjpvWj7CF
— Narendra Modi (@narendramodi) December 5, 2025
भव्य स्वागत और 'दोस्तों' की मुलाक़ात
प्रोटोकॉल तोड़कर स्वागत: गुरुवार शाम (4 दिसंबर, 2025) को पुतिन के दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरने पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए, पीएम मोदी ने पुतिन को गले लगाया, जो दोनों नेताओं के बीच की गहरी व्यक्तिगत और "मित्रता" को दर्शाता है।
#WATCH | रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंचे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति पुतिन भारत के दो दिन के राजकीय दौरे पर हैं। वे 5 दिसंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वीं भारत-रूस सालाना समिट करेंगे। pic.twitter.com/R3KvJquRtJ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 4, 2025
अनौपचारिक चर्चा: एयरपोर्ट से दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने उनके सम्मान में डिनर आयोजित किया और दोनों के बीच अनौपचारिक वन-टू-वन बातचीत हुई।
#WATCH प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारी समिट कई नतीजों के साथ चल रही है। आपकी यात्रा बहुत ऐतिहासिक है। 2001 में जब आपने कार्यभार संभाला और पहली बार भारत की यात्रा हुई आज उसे 25 साल हो गए हैं। उस पहली यात्रा में ही स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की मज़बूत नींव रखी गई थी। मैं… pic.twitter.com/QXszUuAGWn
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 5, 2025
पीएम मोदी का ट्वीट: पीएम मोदी ने पुतिन का स्वागत करते हुए ट्वीट किया, "अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए मुझे खुशी हो रही है। भारत-रूस मित्रता समय की कसौटी पर खरी उतरी है जिससे हमारे लोगों को बहुत लाभ हुआ है।"
आज का महत्वपूर्ण एजेंडा
शुक्रवार (5 दिसंबर) को पुतिन के दौरे का मुख्य दिन है:
औपचारिक स्वागत: राष्ट्रपति भवन में उन्हें तीनों सेनाओं का 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया जाएगा।
राजघाट श्रद्धांजलि: पुतिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
23वां शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन हैदराबाद हाउस में उच्च-स्तरीय कूटनीतिक वार्ता और 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस: शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेता एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे, जहां महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है।
क्या हैं इस दौरे से उम्मीदें और किन विषयों पर बनेगी सहमति?
इस उच्च-दांव वाले दौरे का मुख्य लक्ष्य विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है, खासकर व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से परे सहयोग का विस्तार करना।
1. रक्षा सहयोग (Defence Cooperation)
रक्षा संबंध इस साझेदारी का आधार रहे हैं।
S-400 सिस्टम: S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बची हुई बैटरियों की जल्द डिलीवरी और संभावित रूप से अतिरिक्त S-400 या S-500 सिस्टम की खरीद पर चर्चा।
मेक इन इंडिया: सुखोई-57 (Su-57) जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन, ब्रह्मोस मिसाइल की अगली पीढ़ी के विकास और कल-पुर्जों के स्थानीयकरण पर जोर दिया जाएगा।
RELOS समझौता: हाल ही में रूसी संसद द्वारा अनुमोदित Reciprocal Exchange of Logistics Support (RELOS) समझौते की पुष्टि की जाएगी, जो दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों का उपयोग करने की अनुमति देगा।
2. आर्थिक और व्यापारिक विस्तार (Economic & Trade Expansion)
भारत मुख्य रूप से व्यापार असंतुलन को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
निर्यात को बढ़ावा: भारत चाहता है कि रूस में भारतीय उत्पादों, जैसे फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, कृषि और समुद्री उत्पाद, का निर्यात बढ़े।
निवेश और लक्ष्य: दोनों देश 2025 तक $50 बिलियन के आपसी निवेश और 2030 तक $100 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
अन्य समझौते: शिपिंग, स्वास्थ्य सेवा, उर्वरक, कनेक्टिविटी और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कई समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
3. ऊर्जा और न्यूक्लियर सहयोग (Energy and Nuclear Cooperation)
परमाणु रिएक्टर: रोसाटोम द्वारा भारत में नए न्यूक्लियर रिएक्टर (संभवतः कुडनकुलम यूनिट 7-8) लगाने और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) में सहयोग पर करार हो सकता है।
तेल और गैस: भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक तेल और गैस आपूर्ति अनुबंधों पर बातचीत होगी।
4. अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र
अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी: हाई-टेक सेक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और तकनीक हस्तांतरण में सहयोग।
भू-राजनीतिक तालमेल: यूक्रेन संघर्ष, अफगानिस्तान की स्थिति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण।
बहुपक्षीय मंच: BRICS और SCO जैसे मंचों पर सहयोग को मजबूत करना, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता केलिए भारत की उम्मीदवारी पर रूस का निरंतर समर्थन।
#WATCH रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, "सबसे पहले, मुझे बुलाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद... मैं यूक्रेन में हो रही घटनाओं के बारे में बहुत सारे विवरण शेयर कर सकता हूँ। हम US समेत कुछ पार्टनर्स के साथ मिलकर एक संभावित शांतिपूर्ण बयान पर बात कर रहे हैं। इस स्थिति का… pic.twitter.com/pwJIkoXTOk
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 5, 2025
वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब रूस यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण दुनिया में अलग-थलग पड़ा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद, भारत का अपने पुराने और भरोसेमंद साझेदार रूस के साथ संबंधों को बनाए रखना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पुतिन की यात्रा यह संदेश भी देती है कि वैश्विक दबाव भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से विचलित नहीं कर सकता।