Sunday, 11th of January 2026

राम रहीम को फ़िर मिली 40 दिन की पैरोल: सज़ा और सियासत के बीच छिड़ी नई बहस

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 05th 2026 04:29 PM  |  Updated: January 05th 2026 04:34 PM
राम रहीम को फ़िर मिली 40 दिन की पैरोल: सज़ा और सियासत के बीच छिड़ी नई बहस

राम रहीम को फ़िर मिली 40 दिन की पैरोल: सज़ा और सियासत के बीच छिड़ी नई बहस

GTC News: दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में 20 साल की सज़ा काट रहे गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फ़िर पैरोल मिल गई है। रोहतक के संभागीय आयुक्त ने उसकी 40 दिनों की पैरोल याचिका को मंज़ूरी दी, जिसके बाद वह सोमवार सुबह जेल से रिहा होकर हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंचा।

पैरोल का समय और विवाद का केंद्र

राम रहीम को मिलने वाली पैरोल अक़्सर विवादों में रहती है, क्योंकि इसका समय आमतौर पर महत्वपूर्ण घटनाओं या चुनावों के क़रीब होता है।

15वीं बार राम रहीम की रिहाई: 

अगस्त 2017 में जेल जाने के बाद से राम रहीम पैरोल और फ़रलो (furlough) के माध्यम से लगभग हर साल कई बार जेल से बाहर आया है।

चुनावों से कनेक्शन: पिछले वर्षों में देखा गया है कि हरियाणा, पंजाब या दिल्ली के चुनावों से ठीक पहले उसे पैरोल दी गई। इस बार की पैरोल भी चर्चा में है क्योंकि यह जनवरी के महीने में मिली है, जब डेरा सच्चा सौदा के पूर्व प्रमुख शाह सतनाम जी महाराज का जन्मदिन (25 जनवरी) मनाया जाता है।

क़ानूनी तर्क: सरकार बनाम विपक्ष

राम रहीम की बार-बार रिहाई को लेकर हरियाणा सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस जारी है।

हरियाणा सरकार का रुख:

हरियाणा सरकार ने पहले भी हाईकोर्ट में हलफ़नामा दायर कर कहा है कि राम रहीम कोई 'हार्ड क्रिमिनल' नहीं है। सरकार का तर्क है कि जेल मैनुअल के अनुसार हर कैदी को पैरोल का अधिकार है। 'हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेंपरेरी रिलीज) एक्ट, 2022' के तहत एक कैदी साल में अधिकतम 90 दिन (पैरोल और फरलो मिलाकर) बाहर रह सकता है।

विपक्ष और संगठनों की आपत्ति:

विपक्षी दल: कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि सरकार वोट बैंक की राजनीति के कारण डेरा प्रमुख पर 'मेहरबान' है।

सिख संगठन: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस फै़सले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह न्याय प्रणाली का मज़ाक है।

समानता का सवाल: सामाजिक संगठनों का कहना है कि जहां अन्य कै़दियों को पैरोल के लिए महीनों इंतज़ार करना पड़ता है, वहीं राम रहीम को इतनी जल्दी-जल्दी राहत मिलना "क़ानून के समक्ष समानता" के सिद्धांत पर सवाल खड़ा करता है।

राम रहीम की सज़ा का इतिहास

  वर्ष                              मामला                                                              सज़ा     

2017            दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म                         20 साल का सश्रम कारावास

2019            पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड            आजीवन कारावास

2021            रणजीत सिंह हत्याकांड                               आजीवन कारावास (2024 में हाईकोर्ट से बरी)

पैरोल की शर्तें

इस बार की पैरोल के दौरान राम रहीम को इन शर्तों का पालन करना होगा:

उसे सिरसा डेरा मुख्यालय में ही रहना होगा।

वह किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम या भाषण में हिस्सा नहीं ले सकेगा।

उसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अपनी गतिविधियों की जानकारी देनी होगी।

बहरहाल राम रहीम की पैरोल न केवल एक क़ानूनी मुद्दा बन चुका है, बल्कि हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा प्रभाव डालने वाली वजह भी बन गई है। बार-बार मिलने वाली इस राहत ने सज़ा के 'सुधारात्मक' और 'दंडात्मक' उद्देश्यों के बीच के संतुलन पर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।