GTC News: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हालिया भारत दौरा सिर्फ़ एक औपचारिक मुलाक़ात नहीं था, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और भारत-रूस की विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का एक साफ़ संकेत था। शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस रक्षा से हटकर अब आर्थिक सहयोग और रणनीतिक रोडमैप 2030 को मज़बूत करने पर केंद्रित रहा।
Today’s 23rd India-Russia Annual Summit was an opportunity to comprehensively discuss diverse aspects of India-Russia cooperation. We have agreed on an Economic Cooperation Programme till 2030 in order to diversify our trade and investment linkages. We talked about improving… pic.twitter.com/MIrPMUd6xK
— Narendra Modi (@narendramodi) December 5, 2025
पुतिन के भारत दौरे का लब्बोलुआब और अहम समझौते
पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई 23वीं वार्षिक शिखर वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हुईं:
1. आर्थिक और व्यापारिक विस्तार
व्यापार लक्ष्य: दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा लगभग $68 बिलियन से बढ़ाकर $100 बिलियन करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
आर्थिक रोडमैप: 'भारत-रूस आर्थिक सहयोग और निवेश विकास कार्यक्रम 2030' को अपनाया गया।
मुद्रा में निपटान: द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) के उपयोग को बढ़ाने पर सहमति हुई, जिसका उद्देश्य डॉलर पर निर्भरता कम करना और प्रतिबंधों के जोखिम से बचाव करना है।
एफटीए पर तेज़ी: यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता को तेज़ी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
पर्यटन को बढ़ावा: रूसियों के लिए 30-दिन का मुफ्त ई-टूरिस्ट वीज़ा शुरू करने की घोषणा की गई।
2. रक्षा सहयोग और 'मेक इन इंडिया'
S-400 सिस्टम: S-400 वायु रक्षा प्रणाली की बाकी डिलीवरी और नए स्क्वाड्रन खरीदने पर चर्चा हुई।
संयुक्त विनिर्माण: रूसी मूल के रक्षा उपकरणों के पुर्जों और घटकों के संयुक्त विनिर्माण को 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत बढ़ावा देने पर सहमति बनी। इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Transfer of Technology) और संयुक्त उद्यम स्थापित करना शामिल है।
रणनीतिक संकेत: दोनों नेताओं ने भारत की रक्षा ज़रूरतों के लिए रूस की विश्वसनीयता को फिर से दोहराया, जो अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद संबंध को मज़बूत बनाए रखने का स्पष्ट संदेश था।
3. ऊर्जा और संपर्क
तेल आपूर्ति की गारंटी: पुतिन ने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
परमाणु ऊर्जा: कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) के संचालन के लिए सहयोग जारी रखने और भविष्य में एक दूसरे परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थल पर विचार करने पर सहमति हुई।
कनेक्टिविटी: अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC), उत्तरी समुद्री मार्ग, और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया।
4. श्रम गतिशीलता समझौता
एक महत्वपूर्ण समझौता श्रम गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर करना रहा। यह कुशल भारतीय कर्मचारियों को रूस में रोज़गार प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा, जिससे रूस में अनुमानित श्रम की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
Speaking at the India-Russia Business Forum. https://t.co/gXJ5UGEAhw
— Narendra Modi (@narendramodi) December 5, 2025
वैश्विक संदर्भ और संदेश
इस दौरे ने साफ़ संदेश दिया कि भारत अपनी बहु-संरेखण की विदेश नीति को बनाए रखेगा और किसी भी बाहरी दबाव के आगे अपने ऐतिहासिक और समय-परीक्षित सहयोगी रूस के साथ संबंधों को कमज़ोर नहीं होने देगा। पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के बावजूद इस यात्रा को करके यह भी संकेत दिया कि मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अकेला नहीं है और भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार अभी भी उसके साथ मज़बूती से खड़े हैं।