GTC News: देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) को लेकर जारी गरमागरम बहस और चर्चाओं के बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से उनके संसदीय चैंबर में मुलाक़ात की। इस उच्च-स्तरीय बैठक में AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और हाल ही में नगीना से सांसद बने आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मौजूद रहे।
#WATCH | ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से उनके चैंबर में मुलाकात की। AIMIM MP असदुद्दीन ओवैसी और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी मौजूद हैं। pic.twitter.com/RgNXWVd8ET
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 11, 2025
यह मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार द्वारा यूसीसी को लागू करने की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे अल्पसंख्यकों के धार्मिक और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े संगठनों में चिंता व्याप्त है।
मुलाक़ात का मुख्य एजेंडा: UCC और पर्सनल लॉ
सूत्रों के अनुसार, यह मुलाक़ात मुख्य रूप से दो प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित थी:
1. समान नागरिक संहिता (UCC) पर विरोध
AIMPLB सदस्यों ने मंत्री रिजिजू के सामने यूसीसी को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं को दोहराया। बोर्ड का मानना है कि यूसीसी लागू करना भारतीय संविधान द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
AIMPLB का रुख: प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत अधिनियम, 1937) आस्था और धर्म का अभिन्न अंग है, और इसे बदलना धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना होगा। उन्होंने सरकार से यूसीसी पर जल्दबाजी में कोई भी कदम न उठाने का आग्रह किया।
समावेशी विकास की मांग: बोर्ड ने कहा कि सरकार को देश के समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि ऐसे संवेदनशील कानूनी मामलों पर जो देश की सामाजिक विविधता को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
2. अल्पसंख्यक मामलों पर चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के समक्ष मुस्लिम समुदाय से संबंधित कई विकास और कल्याणकारी मुद्दों पर भी चर्चा की, जिसमें शिक्षा, वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल था।
ओवैसी और चंद्रशेखर आज़ाद की मौजूदगी का महत्व
इस बैठक में दो प्रभावशाली युवा सांसदों - असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आज़ाद - की उपस्थिति को राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM): ओवैसी यूसीसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ के कट्टर विरोधी रहे हैं। उनकी उपस्थिति ने AIMPLB के विरोध को एक सशक्त राजनीतिक आवाज प्रदान की। यह दर्शाता है कि धार्मिक संगठन और राजनीतिक नेता दोनों मिलकर इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
चंद्रशेखर आज़ाद (आज़ाद समाज पार्टी): दलितों की राजनीति के प्रतीक के रूप में उभरे चंद्रशेखर आज़ाद की उपस्थिति यह संकेत देती है कि मुस्लिम और दलित नेतृत्व सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे पर एक साथ आ रहे हैं। यह विपक्षी एकता और सामाजिक समावेश की एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करता है, खासकर यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू का आश्वासन
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल की चिंताओं को ध्यान से सुना। हालांकि उन्होंने सरकार की आधिकारिक स्थिति पर कोई तत्काल बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को संवैधानिक प्रावधानों और सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ने का आश्वासन दिया।
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यूसीसी का मामला भारत के विधि आयोग के विचाराधीन है और सरकार कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और विचार-विमर्श करेगी।
आगामी राजनीतिक विमर्श
यह बैठक दर्शाती है कि यूसीसी का मुद्दा आगामी वर्षों में भारतीय राजनीति के केंद्र में बना रहेगा। AIMPLB और अल्पसंख्यक-दलित गठबंधन का यह संयुक्त प्रयास सरकार के लिए इस विवादास्पद सुधार को लागू करने के रास्ते में एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक चुनौती पेश कर सकता है।