नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। सोमवार, 5 जनवरी 2026 की रात को विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ कथित तौर पर विवादित नारेबाज़ी हुई। यह घटना उस समय हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साज़िश के मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
जेएनयू प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ को पत्र लिखकर पीएम के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगाए जाने के संबंध में FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है।ख़बर विस्तार से पढ़ने के लिए जुड़ें #PBSHABD के साथ, अभी जुड़ने के लिए क्लिक करें:… pic.twitter.com/m55iupGoLy
— PB-SHABD (@PBSHABD) January 6, 2026
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के साबरमती हॉस्टल के बाहर सोमवार रात को भारी तनाव और नारेबाज़ी का माहौल देखा गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर दोषियों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का अनुरोध किया है।
मैंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लगाए गए भड़काऊ और उकसाने वाले नारों को लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त @CPDelhi @CellDelhi से शिकायत दर्ज कराई है।@PMOIndia @HMOIndia pic.twitter.com/xa2w1x5q0Y
— Adv.Vineet Jindal (@vineetJindal19) January 6, 2026
घटना का मुख्य कारण: सुप्रीम कोर्ट का फै़सला
सोमवार, 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने उमर खालिद और शरजील इमाम को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित 'बड़ी साज़िश' (Larger Conspiracy) मामले में ज़मानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने टिप्पणी की कि उनके ख़िलाफ़ प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामले के पर्याप्त सबूत हैं। इसी फै़सले के बाद जेएनयू परिसर में छात्रों का एक समूह विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुआ।
'नाइट ऑफ रेज़िस्टेंस' और नारेबाज़ी
मिली जानकारी के बक़ौल, जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) से जुड़े छात्रों ने साबरमती हॉस्टल के बाहर "A Night of Resistance with Guerrilla Dhaba" नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था।
उद्देश्य: यह कार्यक्रम मूल रूप से 5 जनवरी 2020 को जेएनयू परिसर में हुई हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए रखा गया था।
विवाद: कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के ख़िलाफ़ तीखी नारेबाज़ी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में छात्रों को "मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर" जैसे विवादित नारे लगाते हुए सुना जा सकता है।
जेएनयू प्रशासन का कड़ा रुख़
इस बाबत जेएनयू के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (CSO) ने वसंत कुंज (नॉर्थ) पुलिस स्टेशन के एसएचओ को पत्र लिखकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।
आरोप: प्रशासन ने कहा है कि यह नारेबाज़ी न केवल विश्वविद्यालय की आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) भी है।
पहचान: पत्र में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा सहित कई अन्य छात्रों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें नारेबाजी के दौरान मौके पर पहचाना गया था।
आंतरिक जांच: विश्वविद्यालय ने एक आंतरिक जांच समिति भी गठित की है जो वीडियो फुटेज़ के आधार पर छात्रों की भूमिका की जांच करेगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' बनाम 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' की बहस छेड़ दी है।
भाजपा: भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रविरोधी कृत्य बताते हुए कहा है कि जो लोग संविधान और न्यायपालिका में विश्वास नहीं रखते, वे ही ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे "पाकिस्तानी मानसिकता" क़रार दिया।
#WATCH | पटना: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कल JNU कैंपस में PM मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई कथित नारेबाजी पर कहा, "JNU 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', राहुल गांधी जैसी देश विरोधी मानसिकता वाले लोग, चाहे वह RJD हो, TMC हो, या वामदल हो उनका कार्यालय बन गया है। उन्हें… pic.twitter.com/gXOTb5tzfH
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 6, 2026
कांग्रेस: कांग्रेस के भीतर इस पर अलग-अलग राय दिखी। नेता उदित राज ने इसे छात्रों का "आक्रोश" बताया, जबकि संदीप दीक्षित ने कहा कि विरोध का अधिकार है, लेकिन 'क़ब्र' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना भाषा की मर्यादा का उल्लंघन है।
Delhi: On the sloganeering at JNU campus last night, Congress leader Sandeep Dixit says, "Everyone have the right to oppose anything—that is your democratic right. Court judgments are delivered, and some people support them while others do not; that is a matter of personal… pic.twitter.com/RZ9hxsuMTA
— IANS (@ians_india) January 6, 2026
JNUSU: छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा का कहना है कि ये नारे वैचारिक थे और किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं थे। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया।
जेएनयू की वर्तमान स्थिति
फिलहाल जेएनयू परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है और क़ानूनी राय ले रही है कि क्या इन नारों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।