GTC News: देश की राजधानी में स्वच्छता के दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई सामने आई है। दरअसल डीपीसीसी (DPCC) की ताज़ा रिपोर्ट और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक़, दिल्ली अपनी कुल कचरा उत्पादन क्षमता का केवल 64% ही उपचारित कर पा रही है। शेष 36% कचरा बिना किसी वैज्ञानिक उपचार के सीधे लैंडफिल साइटों पर फेंका जा रहा है।
आंकड़ों की नज़र में संकट
दिल्ली की वर्तमान स्थिति को निम्नलिखित आंकड़ों से समझा जा सकता है:
विवरण आंकड़े (प्रतिदिन)
कुल कचरा उत्पादन 11,852 टन
स्थापित प्रसंस्करण क्षमता 8,173 टन
वास्तव में संसाधित कचरा 7,611 टन
सीधे डंपसाइट जाने वाला कचरा 4,241 टन
कूड़े के पहाड़ जल्द होंगे साफ़!पिछली सरकार द्वारा दिल्ली को दी गई गंदगी और कूड़े को हम निरंतर साफ़ कर रहे हैं।आज दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 35,000 मीट्रिक टन कचरे की बायोमाइनिंग की जा रही है।हमारा संकल्प है - दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाना। pic.twitter.com/AGbsZiple0
— Manjinder Singh Sirsa (@mssirsa) December 19, 2025
डंपसाइटों पर बढ़ता बोझ
रिपोर्ट के मुताबिक़, संसाधित न हो पाने वाला यह 4,241 टन कचरा हर दिन भलस्वा, ग़ाज़ीपुर और ओखला जैसे लैंडफिल साइटों पर जमा हो रहा है। ये डंपसाइट पहले ही अपनी क्षमता से कई गुना अधिक भर चुके हैं। ख़ासतौर पर ग़ाज़ीपुर लैंडफिल की ऊंचाई क़ुतुब मीनार के बराबर पहुंचने को है, जो आसपास के इलाक़ों के लिए गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम पैदा कर रही है।
संकट के मुख्य कारण
पृथक्करण (Segregation) की कमी: घरों से निकलने वाले कूड़े को गीले और सूखे कचरे में अलग न करना सबसे बड़ी समस्या है। मिश्रित कचरे को मशीनों द्वारा संसाधित करना कठिन और खर्चीला होता है।
पुराने प्लांट और कम क्षमता: कचरे से बिजली बनाने वाले (Waste-to-Energy) प्लांट और कंपोस्टिंग यूनिट्स की क्षमता शहर की बढ़ती जनसंख्या के मुक़ाबले काफ़ी कम है।
निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरा: सामान्य कूड़े के साथ-साथ मलबे का अवैध निपटान भी डंपसाइटों का आकार बढ़ा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट और NGT की सख़्ती
इस स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराज़गी जताते हुए इसे "सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल" (Public Health Emergency) की स्थिति बताया है। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को फटकार लगाते हुए कहा कि दिसंबर 2027 तक का इंतज़ार करना बहुत लंबा समय है। एनजीटी ने भी उपराज्यपाल की अध्यक्षता वाली समिति को निर्देश दिए हैं कि वे कचरा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को युद्धस्तर पर मज़बूत करें।
भविष्य की योजना: क्या है समाधान?
एमसीडी ने 2026 और 2027 के लिए नई समय सीमा तय की है:
ओखला डंपसाइट: जुलाई 2026 तक समतल करने का लक्ष्य।
भलस्वा डंपसाइट: दिसंबर 2026 तक।
ग़ाज़ीपुर डंपसाइट: दिसंबर 2027 तक।
नई क्षमता: 2025 से 2028 के बीच 7,750 टन अतिरिक्त प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने की योजना है, ताकि भविष्य की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।