मिलानो से संगम तक: माघ मेला तक पहुंची एक विदेशी युवती की आध्यात्मिक खोज

By:  Mohd Juber Khan January 9th 2026 02:47 PM

प्रयागराज: संगम तट पर आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 में इन दिनों आस्था के कई अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। इसी फ़ेहरिस्त में इटली के मिलानो शहर से आई 22 वर्षीय लुक्रेसिया और उनके पिता पेरांजल (आंजलो) अपनी आध्यात्मिक यात्रा की वजह से मेले में आकर्षण और चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। गौरतलब है कि लुक्रेसिया और उनके पिता संगम की रेती पर सनातन धर्म की सादगी और शांति का अनुभव कर रहे हैं। ये कहना शायद ग़लत नहीं होगा कि प्रयागराज माघ मेले में इन दिनों इस विदेशी परिवार की मौजूदगी लोगों को अचंभित कर रही है। असल में इटली की रहने वाली लुक्रेसिया, जो अपनी उम्र के अन्य युवाओं की तरह पश्चिमी चकाचौंध में रहने के बजाय, भारतीय ऋषि-परंपरा को समझने प्रयागराज आई हैं। वे यहां अपने पिता के साथ एक तंबू (टेंट) में प्रवास कर रही हैं और पूरी तरह से भारतीय रंग-ढंग में ढल चुकी हैं।

नैमिषारण्य के गुरु से मिला ज्ञान

लुक्रेसिया और उनके पिता, सीतापुर के नैमिषारण्य से आए नागा संन्यासी मनमौजी रामपुरी महाराज के सानिध्य में समय बिता रहे हैं। दरअसल लुक्रेसिया उन्हें अपना गुरु मानती हैं।

मुलाक़ात की कहानी: बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में लुक्रेसिया पहली बार महाराज के संपर्क में आई थीं। नैमिषारण्य की महिमा और गुरु के वचनों ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने सनातन मार्ग को अपनाने का फ़ैसला कर लिया।

साधना और शांति: लुक्रेसिया का कहना है कि उन्हें यहां आकर जो शांति मिलती है, वह मिलानो के शोर-शराबे वाले जीवन में नहीं मिली। वे टूटी-फूटी हिंदी में 'जय श्री राम' और 'गंगा मैया की जय' का उद्घोष भी करती हैं।

भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव

लुक्रेसिया के पिता पेरांजल भी अपनी बेटी के इस झुकाव से बेहद ख़ुश हैं। दोनों ही पिता-पुत्री शिविर में आम श्रद्धालुओं की तरह रहते हैं। वे संगम की रेती को 'धरती का स्वर्ग' बताते हैं। लुक्रेसिया हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन करती हैं और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी यह श्रद्धा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

माघ मेला 2026 की भव्यता

योगी सरकार द्वारा आयोजित इस वर्ष का माघ मेला महाकुंभ 2025 की सफ़लता के बाद और भी भव्य रूप में नज़र आ रहा है।

क्षेत्रफल: मेला क्षेत्र को लगभग 800 हेक्टेयर में फैलाया गया है।

सुविधाएं: विदेशी पर्यटकों के लिए गाइड, सूचना केंद्र और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

विदेशी मेहमान: प्रशासन के मुताबिक़, इस बार विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो महाकुंभ की वैश्विक ब्रांडिंग का नतीजा है।

बहरहाल लुक्रेसिया की यह कहानी दिखाती है कि सनातन धर्म की सीमाएं भौगोलिक नहीं है। मिलानो की सड़कों से निकलकर संगम की रेती तक का उनका यह सफर आस्था और शांति की अटूट खोज का प्रतीक है।

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