GTC News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी ने योगी सरकार के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में हज़ारों कार्यकर्ताओं ने विधान भवन का घेराव करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई और कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।
विधानसभा घेराव: लखनऊ की सड़कों पर भारी हंगामा
कांग्रेस ने इस प्रदर्शन का आह्वान मनरेगा (MGNREGA) के बकाये वेतन, महंगाई, बेरोज़गारी और राज्य की क़ानून-व्यवस्था जैसे ताज़ा मुद्दों को लेकर किया था।
विरोध के बीच हुई पुलिस कार्रवाई
प्रदेश भर से आए कांग्रेस कार्यकर्ता माल एवेन्यू स्थित पार्टी कार्यालय पर सुबह से ही जुटना शुरू हो गए। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पहले ही हज़रतगंज, बापू भवन और विधान सभा मार्ग पर सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम कर दिया था। जैसे ही कार्यकर्ताओं का हुजूम विधान भवन की ओर बढ़ा, पुलिस ने तीन-स्तरीय बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। नतीजतन पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और आराधना मिश्रा 'मोना' सहित दर्जनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। इन्हें बस में भरकर 'इको गार्डन' ले जाया गया।
प्रदर्शन के प्रमुख कारण
मनरेगा मज़दूरों का मुद्दा: अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले 11-12 महीनों से मज़दूरों का वेतन रोक रखा है और योजना को ख़त्म करने की साज़िश रची जा रही है।
महंगाई और बेरोज़गारी: बढ़ती क़ीमतों और युवाओं को रोज़गार न मिलने के ख़िलाफ़ कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाज़ी की।
बाज़ारों का ध्वस्तीकरण: कांग्रेस ने हाल ही में बाज़ारों (जैसे दालमंडी) में हुई तोड़फोड़ और स्थानीय व्यापारियों के नुकसान का मुद्दा भी ज़ोर-शोर से उठाया।
क़ानून व्यवस्था: राज्य में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों और कथित पुलिसिया अत्याचार को लेकर सरकार को घेरा गया।
सामने आई नेताओं की प्रतिक्रिया
हिरासत में लिए जाने के दौरान अजय राय ने मीडिया से कहा, "योगी सरकार दमनकारी नीति अपना रही है। हमारे कार्यकर्ताओं को जिलों में ही हाउस अरेस्ट किया गया, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। यह संघर्ष जेल जाने से नहीं थमेगा, हम जनता के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेंगे।"
वहीं, प्रशासन का तर्क था कि विधानसभा सत्र के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी गई थी और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाया गया। बहरहाल, लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फ़िर उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की सक्रियता को दिखा दिया है। हालांकि कई नेता अब भी हिरासत में हैं, लेकिन कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर आंदोलन और तेज़ किया जाएगा, ताकि मौजूदा सरकार की जवाबदेही तय की जा सके।