अयोध्या: श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद, भगवान राम की नगरी अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभरी है। धार्मिक पर्यटन में आए अभूतपूर्व उछाल के चलते, विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स का अनुमान है कि अयोध्या की पर्यटन अर्थव्यवस्था वर्ष 2028 तक 18,000 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न कर सकती है। यह वृद्धि न केवल स्थानीय व्यवसायों को नई ऊंचाइयाँ दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है।
पर्यटन अर्थव्यवस्था में रिकॉर्डतोड़ उछाल
राम मंदिर निर्माण पूरा होने और भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है।
पर्यटकों की संख्या: रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2024 में अयोध्या में 16.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जो वर्ष 2023 के मुकाबले 10.68 करोड़ अधिक थे।
राजस्व अनुमान (2028): विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या के कारण, 2028 तक अयोध्या की पर्यटन अर्थव्यवस्था से 18,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
यूपी पर्यटन में हिस्सेदारी: अनुमान है कि 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ रुपये का उद्योग बन जाएगा, जिसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25% होगा।
बुनियादी ढांचा और निवेश
बढ़ते पर्यटन को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ निजी निवेशकों ने भी अयोध्या में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश किया है। होटल उद्योग में क्रांति: शहर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से अधिक होटल खुल चुके हैं, और आईएचसीएल (ताज ग्रुप), मैरियट, रैडीशन, कामट और लेमन ट्री जैसी निजी क्षेत्र की प्रमुख होटल कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। नए व्यापारिक केंद्र: पिज्जा हट, डोमिनोज, पैंटालून जैसे बड़े ब्रांड्स के आउटलेट खुलने से अयोध्या अब एक बड़े ब्रांड्स के केंद्र के तौर पर भी स्थापित हो रही है।
रियल एस्टेट और टाउनशिप: राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में रियल एस्टेट के कारोबार ने भी गति पकड़ी है, जिसके चलते ग्रीन फील्ड टाउनशिप का निर्माण भी शुरू हो चुका है।
स्थानीय व्यवसायों को लाभ
पर्यटन में इस उछाल का सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था और छोटे व्यापारियों को मिल रहा है।
रोजगार सृजन: पर्यटन क्षेत्र में इजाफा होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले हैं, जिससे पलायन रुका है और अयोध्यावासी अपने शहर में आत्मनिर्भर हो रहे हैं।
बढ़ा कारोबार: पूजा सामग्री, प्रसाद, स्मृति चिन्ह, फूल और शिल्प की दुकानों का कारोबार रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रहा है। कई छोटे व्यापारियों की आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
आर्थिक गतिविधियों का हब: अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र न रहकर, आर्थिक क्रियाकलापों का एक प्रमुख हब बन चुका है।
अयोध्या का यह आर्थिक कायाकल्प यह दर्शाता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत किस तरह किसी क्षेत्र के लिए 'अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी' साबित हो सकती है, जिससे राज्य की जीडीपी को भी महत्वपूर्ण बल मिल रहा है।