नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR फॉर्म जमा कराने की समय सीमा को एक बार फिर बढ़ा दिया है। आयोग का यह निर्णय इन क्षेत्रों के लाखों मतदाताओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो फॉर्म जमा कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे।
इन प्रदेशों को मिली राहत
समय सीमा में बढ़ोतरी का यह फैसला निम्नलिखित छह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मतदाताओं पर लागू होगा:
उत्तर प्रदेश
तमिलनाडु
गुजरात
मध्य प्रदेश
छत्तीसगढ़
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (केंद्र शासित प्रदेश)
समयसीमा बढ़ाने का कारण
आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह फैसला मतदाताओं को, विशेषकर दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को, आवश्यक दस्तावेज़ और जानकारी जुटाने के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से लिया गया है। शुरुआती समय सीमा ख़त्म होने के बाद विभिन्न नागरिक समूहों और प्रशासनिक इकाइयों से समय बढ़ाने के लिए अनुरोध प्राप्त हुए थे, जिसके बाद ECI ने जनहित में यह क़दम उठाया।
क्या है SIR फॉर्म?
SIR फॉर्म (Special Intensive Revision) का उपयोग मुख्य रूप से उन सरकारी कर्मचारियों, सेवा कर्मियों, या अन्य विशिष्ट श्रेणियों के मतदाताओं के लिए किया जाता है जो अपनी ड्यूटी या सेवा की आवश्यकता के कारण अपने मूल निवास स्थान से दूर हैं। यह फॉर्म सुनिश्चित करता है कि उनका नाम मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज हो और वे आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, चाहे वह डाक मतपत्र (Postal Ballot) के माध्यम से हो या अन्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत।
विशेषज्ञों का मत: चुनावी मामलों के जानकारों का मानना है कि समय सीमा बढ़ाने का यह फैसला चुनाव आयोग की समावेशी नीति को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित न रहे।
आयोग ने सभी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि वे इस विस्तारित समय सीमा का व्यापक प्रचार करें, ताकि अधिकतम मतदाता इस अवसर का लाभ उठा सकें। मतदाता अब नई निर्धारित अंतिम तिथि तक अपने SIR फॉर्म जमा कर सकते हैं।