Saturday, 10th of January 2026

अखिलेश का 'PDA पंचांग' कार्ड: हिंदू कैलेंडर के बहाने पिछड़ों-दलितों को साधने की बड़ी तैयारी

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 07th 2026 05:54 PM  |  Updated: January 07th 2026 05:54 PM
अखिलेश का 'PDA पंचांग' कार्ड: हिंदू कैलेंडर के बहाने पिछड़ों-दलितों को साधने की बड़ी तैयारी

अखिलेश का 'PDA पंचांग' कार्ड: हिंदू कैलेंडर के बहाने पिछड़ों-दलितों को साधने की बड़ी तैयारी

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मिशन 2027 की तैयारी के तहत एक नया और अनूठा दांव चला है। दरअसल अब पार्टी ने 'समाजवादी PDA पंचांग-2026' जारी किया है, जिसके माध्यम से सपा हिंदू कैलेंडर के पारंपरिक स्वरूप का उपयोग कर पिछड़े (P), दलित (D) और अल्पसंख्यक (A) वर्गों के घरों तक अपनी राजनीतिक विचारधारा पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

सियासी जानकारों की मानें तो लोकसभा चुनाव 2024 में 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की सफ़लता के बाद, अखिलेश यादव अब इसे ज़मीनी स्तर पर और अधिक गहरा करने में जुट गए हैं। यही वजह है कि नए साल के मौक़े पर जारी किया गया 'PDA पंचांग' केवल तारीख़ों का संग्रह नहीं, बल्कि सपा का एक सांस्कृतिक और वैचारिक हथियार माना जा रहा है।

क्या है PDA पंचांग की ख़ासियत?

यह पंचांग पारंपरिक हिंदू कैलेंडर की तरह ही तिथियों, व्रतों और त्योहारों की जानकारी देता है, लेकिन इसमें कुछ विशेष जोड़ किए गए हैं:

महापुरुषों की गाथा: इसमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और कांशीराम जैसे दलित और पिछड़ा वर्ग के नायकों की जयंती और पुण्यतिथि को प्रमुखता दी गई है।

समाजवादी विरासत: नेताजी मुलायम सिंह यादव और डॉ. राम मनोहर लोहिया से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियों का विशेष उल्लेख है।

रोज़मर्रा के कॉलम: पंचांग में आम लोगों की ज़रूरतों के लिए डायरी और नोट्स जैसे कॉलम भी दिए गए हैं, ताकि लोग इसे घर की दीवार पर स्थायी रूप से लटकाएं।

रणनीति: 'घर-घर दस्तक' और 'सनातनी' छवि

मीडिया गलियारों में ये चर्चा है कि इस पंचांग के ज़रिए अखिलेश यादव एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं:

सॉफ्ट हिंदुत्व और जुड़ाव: पंचांग या कैलेंडर हर हिंदू घर की बुनियादी ज़रूरत है। इसके ज़रिए सपा उन घरों में भी पैठ बनाना चाहती है जहां वे अब तक केवल रैलियों के ज़रिए पहुंचते थे।

काउंटर नैरेटिव: भाजपा की 'हिंदुत्व' राजनीति के मुक़ाबले, सपा 'सामाजिक न्याय' वाले नायकों को धार्मिक कैलेंडर में जगह देकर यह संदेश दे रही है कि पिछड़ा और दलित समाज ही असली हिंदू संस्कृति का आधार है।

भाजपा का पलटवार: "पाकिस्तानी कैलेंडर" क़रार

सपा के इस क़दम पर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने इसे 'तुष्टिकरण' की राजनीति बताया है।

मनोज तिवारी का बयान: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इसे "पाकिस्तानी कैलेंडर" बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें राम मंदिर और हिंदू आस्था के कई महत्वपूर्ण केंद्रों की अनदेखी की गई है।

राम मंदिर विवाद: भाजपा का तर्क है कि जिस पंचांग में अयोध्या के भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि न हो, वह सनातनी पंचांग नहीं हो सकता।

सपा की पंचांग के वितरण की योजना

सपा ने इस पंचांग को केवल डिजिटल स्तर पर ही नहीं, बल्कि भौतिक रूप में भी गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना बनाई है।

प्रभारी: सपा के प्रदेश सचिव डॉ. अजय चौरसिया को इसके प्रकाशन और वितरण की मुख्य ज़िम्मेदारी दी गई है।

लक्ष्य: वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या जैसे सांस्कृतिक केंद्रों से लेकर पश्चिमी यूपी के दलित बाहुल्य इलाक़ों तक लाखों प्रतियां मुफ्त बांटी जा रही हैं।

               PDA पंचांग: एक नज़र में

विशेषता                                             विवरण

प्रणेता                                                 अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी)

मुख्य फ़ोकस                                    पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक नायकों का सम्मान

राजनीतिक लक्ष्य                              2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करना

विवाद                                                राम मंदिर की तिथि ग़ायब होने पर भाजपा का विरोध

आगे क्या होगा ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है, लेकिन'PDA पंचांग' के ज़रिए अखिलेश यादव ने यह साफ़ कर दिया है कि वे 2027 की लड़ाई के लिए केवल नारों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे लोगों के 'ड्राइंग रूम' और 'रसोई' तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि यह 'पंचांग' सपा के राजनीतिक भविष्य के 'ग्रह-गोचर' कितना बदल पाता है।