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नोएडा अथॉरिटी पर संकट: पर्यावरण नियमों की अनदेखी बनी मुसीबत

By: GTC News Desk | Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: December 30th 2025 03:41 PM
नोएडा अथॉरिटी पर संकट: पर्यावरण नियमों की अनदेखी बनी मुसीबत

नोएडा अथॉरिटी पर संकट: पर्यावरण नियमों की अनदेखी बनी मुसीबत

नोएडा: नोएडा अथॉरिटी एक बार फिर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निशाने पर है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के वकील द्वारा ट्रिब्यूनल के समक्ष यह स्वीकार किए जाने के बाद कि अथॉरिटी रोजाना पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रही है, मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। एनजीटी ने अब अथॉरिटी पर लगाए जाने वाले पर्यावरणीय मुआवजे की दोबारा गणना करने का आदेश दिया है।

UPPCB का बड़ा क़बूलनामा

ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के वकील ने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि नोएडा अथॉरिटी के विभिन्न विभागों (जैसे जल, बिजली और सिविल विभाग) द्वारा विकास कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों की लगातार अनदेखी की जा रही है।वकील ने कोर्ट में साफ़ कहा कि अथॉरिटी को इन विषयों के प्रति संवेदनशील बनाने की ज़रूरत है, क्योंकि उल्लंघन की प्रक्रिया दैनिक आधार पर चल रही है।

मुआवजे़ की दोबारा गणना का आदेश

एनजीटी ने पाया कि पिछले कुछ वर्षों में नोएडा अथॉरिटी पर लगभग 27 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवज़ा (Environmental Compensation) लगाया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसमें से अब तक केवल एक करोड़ रुपये ही वसूल किए जा सके हैं।

सख़्त निर्देश: कोर्ट ने UPPCB को निर्देश दिया है कि वह अथॉरिटी द्वारा किए गए पिछले और वर्तमान, सभी उल्लंघनों की अवधि की पहचान करे।

पुनर्गणना: नियमों के उल्लंघन के दिनों के आधार पर अब मुआवज़े की नई और सटीक गणना की जाएगी, जिससे अथॉरिटी पर लगने वाला आर्थिक दंड काफी बढ़ सकता है।

क्या हैं उल्लंघन के मुख्य कारण?

आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा दायर याचिका में जिन मुख्य समस्याओं को उठाया गया है, वे इस प्रकार हैं:

सड़क खुदाई और निर्माण: जल पाइपलाइन, एसटीपी (STP) लाइन और बिजली के केबल बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई के दौरान धूल उड़ने से रोकने के उपाय (जैसे ग्रीन नेट या पानी का छिड़काव) नहीं किए जा रहे।

ग्रीन बेल्ट को नुकसान: निर्माण गतिविधियों के कारण शहर के ग्रीन बेल्ट और पेड़ों को भारी नुकसान पहु्ंचाया जा रहा है।

कचरा प्रबंधन: निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट (C&D Waste) का सही तरीके से निपटान न करना।

एनजीटी की अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणियां

CEO की ज़िम्मेदारी: एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने स्पष्ट किया कि नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन न हो।

काग़ज़ी कार्रवाई पर फटकार: कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) की भी खिंचाई की कि वे केवल नोटिस और ईमेल भेजने तक सीमित हैं, जबकि ज़मीन पर स्थिति गंभीर बनी हुई है।

              वर्तमान स्थिति और आंकड़े

विवरण                                          आंकड़े/स्थिति

लगाया गया कुल मुआवजा               ₹27 करोड़ (लगभग)

अब तक हुई वसूली                            ₹1 करोड़

उल्लंघन की प्रकृति                            दैनिक (Daily Basis)

प्रमुख क्षेत्र                                             सेक्टर 116, हिंडन पुश्ता और अन्य निर्माण स्थल

क्या है आगे की राह? 

नोएडा अथॉरिटी को अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। यदि अगली सुनवाई तक ठोस सुधारात्मक क़दम नहीं उठाए गए, तो अथॉरिटी को भारी जुर्माने के साथ-साथ न्यायिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।