Sunday, 11th of January 2026

अखिलेश यादव का नया दांव: 'जय श्री राम' के मुक़ाबले दिया 'जय भीम, जय समाजवाद' का नारा

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 17th 2025 08:16 PM  |  Updated: December 17th 2025 08:16 PM
अखिलेश यादव का नया दांव: 'जय श्री राम' के मुक़ाबले दिया 'जय भीम, जय समाजवाद' का नारा

अखिलेश यादव का नया दांव: 'जय श्री राम' के मुक़ाबले दिया 'जय भीम, जय समाजवाद' का नारा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में नारों की जंग एक बार फिर तेज़ हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के 'जय श्री राम' के नारे का जवाब देने के लिए अब एक नया राजनीतिक मंत्र तैयार किया है। अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अब 'जय भीम, जय समाजवाद' के नारे के साथ जनता के बीच जाएगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे अखिलेश यादव की PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति को जमीन पर उतारने की एक बड़ी कोशिश मान रहे हैं।

वैचारिक ध्रुवीकरण की नई दिशा

अखिलेश यादव ने एक सार्वजनिक सभा के दौरान कहा कि भाजपा धर्म की राजनीति को आधार बनाकर लोगों को बांटती है, जबकि समाजवादी विचारधारा सबको साथ लेकर चलने की बात करती है। उन्होंने कहा:"अगर वो 'जय श्री राम' कहते हैं, तो हमें 'जय भीम और जय समाजवाद' कहने में गर्व है। यह नारा बाबा साहब अंबेडकर के संविधान और डॉ. लोहिया के समानता के विचार को जोड़ता है।"

दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश

'जय भीम' का नारा सीधे तौर पर दलित समुदाय और बहुजन समाज से जुड़ा है। बसपा (BSP) की कमजोर होती पकड़ के बीच अखिलेश यादव की नजर अब उस बड़े दलित वोट बैंक पर है, जो मायावती का साथ छोड़कर नए विकल्प की तलाश में है। 'जय समाजवाद' के साथ 'जय भीम' को जोड़कर सपा यह संदेश देना चाहती है कि वह पिछड़ों के साथ-साथ दलितों की भी सच्ची हितैषी है।

अखिलेश के दांव पर भाजपा का पलटवार 

अखिलेश यादव के इस बयान पर भाजपा ने तीख़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि सपा प्रमुख तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं और 'जय श्री राम' केवल एक नारा नहीं बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था है। भाजपा ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव चुनाव आते ही नारों के ज़रिए जातियों को बांटने का काम शुरू कर देते हैं।

क्या बदलेगा राजनीतिक समीकरण?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नारे के जरिए अखिलेश यादव दो बड़े लक्ष्य साध रहे हैं:

संविधान का मुद्दा: 'जय भीम' के जरिए सपा खुद को संविधान के रक्षक के तौर पर पेश करना चाहती है।

विपक्षी एकता: यह नारा उन विपक्षी दलों को भी सहज महसूस कराता है जो भाजपा की धार्मिक राजनीति के खिलाफ एक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा बनाना चाहते हैं।

नारों की राजनीति: एक नज़र में

दल                           मुख्य नारा                                 राजनीतिक संदेश 

बीजेपी                      जय श्री राम / जय सियाराम   सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदू गौरव

सपा                         जय भीम, जय समाजवाद      सामाजिक न्याय और जातिगत एकता (PDA)

बसपा                       जय भीम, जय भारत              दलित सशक्तिकरण (अंबेडकरवाद)

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अखिलेश यादव का यह नया नारा राज्य की राजनीति को मंडल बनाम कमंडल के एक नए स्वरूप की ओर ले जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जमीन पर जनता 'जय भीम, जय समाजवाद' के इस संगम को कितना स्वीकार करती है।