बरेली/मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक ऐसा सनसनीखेज़ मामला सामने आया है, जहां एक हत्या के दोषी ने 36 साल तक पुलिस को चकमा देने के लिए न केवल अपना नाम बदला, बल्कि अपना धर्म, हुलिया और ठिकाना भी बदल लिया। 70 वर्षीय इस अपराधी ने अपने इस लंबे फरारी के दौरान एक नई पहचान, नया परिवार और एक नई ज़िंदगी बना ली थी। दरअसल यह पूरा मामला बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
बरेली के शाही के रहने वाले प्रदीप सक्सेना को 1987 में हत्या-चोरी के मुकदमे में उम्रकैद की सजा हुई। 2 साल बाद वह पैरोल पर बाहर आया। वापस जेल नहीं लौटा। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया। नाम रखा, अब्दुल रहीम। 36 साल बाद फिर गिरफ्तार हुआ है।@bareillypolice pic.twitter.com/pFavnN1tqT
— Tariq Iqbal (@tariq_iqbal) November 29, 2025
अपराध और सज़ा
अपराधी का नाम: प्रदीप कुमार सक्सेना (मूल निवासी: क़स्बा शाही, बरेली)।
अपराध: प्रदीप सक्सेना पर वर्ष 1987 में अपने ही भाई संजीव सक्सेना की हत्या (धारा 302) और चोरी (धारा 379) का मामला दर्ज हुआ था।
सज़ा और पैरोल: कोर्ट ने प्रदीप को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी। सजा के बाद, उसने 1989 में हाईकोर्ट से पैरोल ली, और इसी दौरान उसने अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ अपील भी दायर की।
पैरोल जंप और पहचान बदलना
फ़रार: 1989 में पैरोल की अवधि ख़त्म होने से पहले ही प्रदीप सक्सेना पुलिस और न्याय की नज़रों से ओझल हो गया। उसने जानबूझकर कोर्ट की कार्यवाही से बचना शुरू कर दिया और अपनी 'फ़रारी' की ज़िंदगी शुरू कर दी।
नई पहचान: पुलिस को चकमा देने के लिए प्रदीप ने एक शातिर योजना बनाई।
नाम परिवर्तन: उसने अपना नाम बदलकर अब्दुल रहीम रख लिया (कुछ रिपोर्ट्स में अब्दुल हमीद भी)।
धर्म परिवर्तन: उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया।
हुलिया परिवर्तन: पहचान छिपाने के लिए उसने दाढ़ी बढ़ा ली और कुर्ता-पजामा पहनना शुरू कर दिया।
ठिकाना परिवर्तन: वह बरेली छोड़कर मुरादाबाद के करूला मोहल्ले में रहने लगा।
नई ज़िंदगी: मुरादाबाद में उसने विधवा मुस्लिम महिला से शादी कर ली और ड्राइवरी का काम करने लगा। स्थानीय लोग उसे 'सक्सेना ड्राइवर' के नाम से भी जानते थे।
हाईकोर्ट का सख़्त आदेश और गिरफ़्तारी
36 साल तक यह शातिर अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर रहा। पुलिस और कोर्ट उसके मूल पते पर समन भेजते रहे, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली।
हाईकोर्ट की सख़्ती (2025): 16 अक्टूबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में सख़्त रुख़ अपनाया और बरेली पुलिस को आरोपी प्रदीप सक्सेना को चार सप्ताह के अंदर गिरफ़्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।
पुलिस एक्शन: हाईकोर्ट के आदेश के बाद बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने सबसे पहले प्रदीप के पैतृक गांव शाही में पूछताछ शुरू की।
कड़ी से कड़ी जुड़ी: पूछताछ के दौरान प्रदीप के भाई सुरेश बाबू का पता चला, जिन्होंने पुलिस को बताया कि प्रदीप ने धर्म बदल लिया है और वह मुरादाबाद के करूला में वाहन चलाने का काम करता है।
गिरफ़्तारी: पुलिस टीम मुरादाबाद पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार (27 नवंबर 2025) को प्रदीप सक्सेना (अब अब्दुल रहीम) को डेलापीर मंडी, बरेली से गिरफ़्तार कर लिया।
'प्रदीप' से 'अब्दुल रहीम' बन 37 साल से फर्रारी काट रहा था भाई का हत्यारा_पुलिस ने दबोचा..!यूपी के बरेली में 1987 के भाई के मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा पाकर पैरोल पर फरार हुआ आरोपी प्रदीप सक्सेना आखिरकार 37 साल बाद दबोचा गया...!2002 में पहचान छुपाने के लिए धर्म बदलकर… pic.twitter.com/H3QAUyDOd7
— Rahul Saini (@JtrahulSaini) November 29, 2025
गिरफ़्तारी के समय प्रदीप को देखकर पुलिस भी हैरान थी। 70 साल से अधिक की उम्र में वह दाढ़ी और हुलिया बदलकर पूरी तरह एक नई पहचान में जी रहा था। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।
यह मामला दिखाता है कि अपराधी चाहे कितने ही शातिर क्यों न हों, क़ानून का शिकंजा देर-सवेर उन तक पहुंच ही जाता है।