Sunday, 11th of January 2026

संगम का 'इकोनॉमिक कॉरिडोर': 15 हज़ार परिवारों को मिला सीधा रोज़गार

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 22nd 2025 04:00 PM  |  Updated: December 22nd 2025 04:00 PM
संगम का 'इकोनॉमिक कॉरिडोर': 15 हज़ार परिवारों को मिला सीधा रोज़गार

संगम का 'इकोनॉमिक कॉरिडोर': 15 हज़ार परिवारों को मिला सीधा रोज़गार

GTC News: माघ मेला क्षेत्र को इस बार लगभग 800 हेक्टेयर में फैलाया गया है, जिसमें 6 मुख्य सेक्टर बनाए गए हैं। इस विस्तार का सबसे बड़ा लाभ संगम के किनारे बसे गांवों को मिला है। मेला प्रशासन के मुताबिक़, इन गांवों के लगभग 15,000 परिवार सीधे तौर पर मेले से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं।

मिट्टी के चूल्हों की 'बंपर' मांग

प्रशासन ने टेंटों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए हीटर और छोटे अनधिकृत गैस सिलेंडरों के उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाया है। इसके विकल्प के रूप में कल्पवासियों (एक महीने तक संगम तट पर निवास करने वाले श्रद्धालु) ने पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों को अपनाया है।

ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी: बदरा सोनौटी और मालवा खुर्द जैसे गांवों की महिलाएं सामूहिक रूप से चूल्हे बनाने में जुटी हैं।

बड़ा ऑर्डर: रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मालवा खुर्द की महिलाओं ने 7,000 से अधिक चूल्हों का ऑर्डर पूरा किया है।

'गोबर के उपले' बने आय का ज़रिया

आधुनिक ईंधन पर पाबंदी ने उपलों (कंडों) की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है। जो परिवार पशुपालन से जुड़े हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त कमाई का समय है।

गांवों में महिलाएं पूरे साल उपले और गोबर की ईंटें तैयार करती हैं, जिन्हें अब मेले में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

एक कल्पवासी परिवार को पूरे महीने के लिए भारी मात्रा में ईंधन की आवश्यकता होती है, जिससे स्थानीय पशुपालकों को घर बैठे बाजार मिल गया है।

निषाद समुदाय और नाविकों की उम्मीदें

इस वर्ष मेले में लगभग 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में संगम स्नान के लिए नाविकों (निषाद समुदाय) की भूमिका अहम हो गई है। दारागंज और झूंसी के नाविकों ने नई नावें तैयार की हैं और अतिरिक्त मज़दूरों को काम पर रखा है। यदि अनुमानित भीड़ का एक छोटा हिस्सा भी नौका विहार करता है, तो यह इस समुदाय के लिए साल की सबसे बड़ी आय होगी।

प्रशासन की तैयारी: महाकुंभ की तर्ज पर हैं इंतज़ाम

माघ मेला 2026 को 2025 के महाकुंभ की सफलता के बाद एक 'मॉडल मेले' के रूप में पेश किया जा रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 7 पांटून पुल बनाए गए हैं और 160 किमी से अधिक चेकर्ड प्लेट वाली सड़कें बिछाई गई हैं।

स्वच्छता: लगभग 22,000 शौचालयों और 28,000 स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था की गई है ताकि यह 'तंबुओं का शहर' रात में भी जगमगाता रहे।

सुरक्षा: एआई (AI) आधारित सर्विलांस और ड्रोन के जरिए भीड़ नियंत्रण की योजना बनाई गई है।

प्रमुख स्नान पर्व 

मेले की आर्थिक गतिविधियां इन प्रमुख स्नान तिथियों पर अपने चरम पर होंगी: | तिथि | पर्व | | :--- | :--- | | 3 जनवरी 2026 | पौष पूर्णिमा (मेले का प्रारंभ) | | 14 जनवरी 2026 | मकर संक्रांति | | 18 जनवरी 2026 | मौनी अमावस्या (सबसे बड़ा स्नान) | | 15 फरवरी 2026 | महाशिवरात्रि (मेले का समापन) |

ये बात को कहना सही होगा कि माघ मेला 2026 यह सिद्ध कर रहा है कि कैसे धार्मिक आयोजन आधुनिक प्रतिबंधों (जैसे हीटर/सिलेंडर बैन) को ग्रामीण कौशल (मिट्टी के चूल्हे/उपले) के साथ जोड़कर एक मज़बूत स्थानीय अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं। यह न केवल परंपराओं को जीवित रख रहा है, बल्कि हज़ारों ग्रामीण घरों में ख़ुशहाली का दीप भी जला रहा है।