स्पेशल रिपोर्ट: पुनर्जीवित तमसा - आस्था और स्वच्छता का संगम

By  Mohd Juber Khan December 30th 2025 06:00 PM

GTC News: पौराणिक महत्व वाली और गंगा की प्रमुख सहायक नदी तमसा आज उत्तर प्रदेश में स्वच्छता और नदी पुनरुद्धार की एक नई मिसाल बन चुकी है। कभी गंदगी, गाद और जलकुंभी के जाल में फंसी यह नदी आज अपनी निर्मल धारा और स्वच्छ तटों के कारण 'स्वच्छता की पहचान' के रूप में उभरी है। ख़ासतौर पर आज़मगढ़ और अयोध्या ज़िलों में प्रशासन और जनभागीदारी के समन्वय ने इस मृतप्राय नदी को पुनर्जीवित कर दिया है।

 लुप्त होती पहचान से 'मॉडल' बनने तक का सफ़र

तमसा नदी, जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है, पिछले कुछ दशकों में प्रदूषण और अतिक्रमण का शिकार होकर एक नाले जैसी स्थिति में पहुंच गई थी।

समस्या: नदी के उद्गम स्थल से लेकर कई किलोमीटर तक जलकुंभी का साम्राज्य था और शहर का कचरा सीधे इसमें गिर रहा था।

परिवर्तन: साल 2025 में आज़मगढ़ ज़िला प्रशासन ने 'तमसा पुनरुद्धार अभियान' छेड़ा। ज़िलाधिकारी के नेतृत्व में सिंचाई विभाग और पंचायती राज विभाग ने मिलकर नदी की गाद (De-silting) निकालने और प्रवाह को सुचारू बनाने का काम किया।

जनभागीदारी: जब सरकारी प्रोजेक्ट बना 'जन आंदोलन'तमसा की स्वच्छता की सबसे बड़ी विशेषता सामुदायिक सहभागिता रही है।

स्वच्छता कर्मी और ग्रामीण: हज़ारों सफ़ाई कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और 'तमसा रक्षकों' ने श्रमदान कर नदी के तटों को कचरा मुक्त किया।

घाटों का कायाकल्प: चंद्रमा ऋषि आश्रम और दुर्वासा ऋषि आश्रम जैसे पौराणिक स्थलों के पास मौजूद घाटों की विशेष सफ़ाई की गई। अब इन घाटों पर नियमित आरती और योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

तकनीक और पर्यावरण का समन्वय

प्रशासन ने नदी की निगरानी और संरक्षण के लिए आधुनिक तरीक़ों का इस्तेमाल किया है:

रिवर ड्रोन सर्वे: उत्तर प्रदेश सरकार की रिवर ड्रोन सर्वे प्रणाली के ज़रिए नदी के उन हिस्सों को चिह्नित किया गया जहां प्रदूषण सबसे ज़्यादा था।

वृक्षारोपण: नदी के किनारों पर मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए 65,000 से ज़्यादा पौधे रोपे गए हैं, जिससे तटों पर हरियाली वापस लौट आई है।

ज़ीरो डिस्चार्ज लक्ष्य: अब लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नाले का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के तमसा में न गिरे।

सांस्कृतिक और आर्थिक लाभ

नदी के स्वच्छ होने से न केवल पर्यावरण सुधरा है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है:

धार्मिक पर्यटन: रामायण काल से जुड़े होने के कारण, अब श्रद्धालु फिर से इन घाटों पर स्नान और पूजा-पाठ के लिए जुटने लगे हैं।

जलीय जीवन की वापसी: पानी की गुणवत्ता (BOD स्तर) में सुधार के बाद नदी में मछलियां और अन्य जलीय जीव फिर से दिखाई देने लगे हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सुखद संकेत है।

                                 तमसा नदी: एक नज़र में:-                                  

विवरण                                                                                      जानकारी

उद्गम                                                                                         लखनीपुर, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

कुल लंबाई                                                                               लगभग 264 किलोमीटर

प्रमुख ज़िले                                                                              अयोध्या, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया

महत्व                                                                                       भगवान राम ने वनवास की पहली रात इसी नदी के तट पर बिताई थी।

कुल-मिलाकर तमसा नदी का कायाकल्प यह साबित करता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जन सहयोग एक साथ मिल जाएं, तो दम तोड़ती नदियों को भी नया जीवन दिया जा सकता है। आज तमसा न केवल गंगा की सहायक है, बल्कि 'स्वच्छ भारत अभियान' का एक जीवंत उदाहरण भी है।

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