गणतंत्र दिवस पर मायावती का संदेश: "लुभावने वादों की भूलभुलैया से बाहर निकलकर हो जनकल्याण"

By:  Mohd Juber Khan January 26th 2026 03:49 PM

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से देश को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने जहां एक ओर नागरिकों को बधाई दी, वहीं दूसरी ओर सरकारों के कामकाज के तरीक़ों पर गंभीर सवाल खड़े किए।

संविधान की मंशा और सरकारों का 'छलावा'

मायावती ने कहा कि गणतंत्र दिवस का महत्व केवल संविधान पर गर्व करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकारों को नसीहत देते हुए ये बिंदु उठाए:

ईमानदार आकलन की ज़रूरत: उन्होंने ज़ोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों को यह मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या उनके दावे हक़ीक़त में बदल रहे हैं या वे केवल "लुभावने वादों की भूलभुलैया" हैं।

लोकतंत्र की मज़बूती: उन्होंने सवाल किया कि क्या देश ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में वैसी प्रगति की है जैसी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान में परिकल्पित की थी?

जीवन स्तर में सुधार: बसपा प्रमुख ने कहा कि वास्तविक विकास तभी माना जाएगा जब आम जनता के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार दिखेगा।

मान्यवर कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग

अपने संबोधन के अंत में मायावती ने एक बार फिर केंद्र सरकार से बसपा के संस्थापक कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा:

"बहुजन समाज के करोड़ों ग़रीबों और उपेक्षित लोगों को आत्म-सम्मान का जीवन देने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी को अब और देरी किए बिना 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाना चाहिए। यह उनके करोड़ों समर्थकों की प्रबल इच्छा है।"

मायावती ने तर्क दिया कि जिस तरह बाबा साहेब को लंबे इंतजार के बाद यह सम्मान मिला, उसी तरह कांशीराम जी के संघर्षों को भी राष्ट्र द्वारा मान्यता मिलना अनिवार्य है।

पद्म पुरस्कार विजेताओं को दी बधाई

मायावती ने गणतंत्र दिवस पर घोषित पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री और वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले नागरिकों और उनके परिवारों को भी हार्दिक बधाई दी। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा देने वालों के योगदान की सराहना की।

बहरहाल, मायावती का यह बयान एक बार फिर यह साफ़ करता है कि बसपा आने वाले समय में 'संविधान बचाओ' और 'बहुजन सम्मान' के एजेंडे को लेकर आक्रामक रहने वाली है। उनका संदेश सीधे तौर पर हाशिए पर खड़े समाज के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करता है।

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