करोड़ों की ठगी करने वाले 'डिजिटल अरेस्ट' गैंग का भंडाफोड़, महिला समेत 5 गिरफ़्तार
मथुरा: उत्तर प्रदेश की मथुरा साइबर पुलिस ने एक बेहद शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफ़ाश किया है, जो 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर मासूम लोगों को अपना शिकार बनाकर उनसे करोड़ों रुपये की उगाही कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक महिला सहित कुल 5 आरोपियों को गिरफ़्तार किया है। यह गैंग ख़ुद को सीबीआई (CBI), क्राइम ब्रांच और इंटरपोल जैसे बड़े संस्थानों का अधिकारी बताकर लोगों को डराता था। हाल ही में इस गैंग ने एक 75 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला को लगभग 15 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर उनसे 2.04 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ठग ली थी।
ठगी का तरीक़ा (Modus Operandi)
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गैंग मनोविज्ञान का सहारा लेकर लोगों में डर पैदा करता था। इनकी कार्यप्रणाली कुछ इस प्रकार थी:
फेक कॉल और डराना: ठग पीड़ित को कॉल करके बताते थे कि उनके आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी या आतंकी गतिविधियों में हुआ है।
डिजिटल अरेस्ट: स्काइप (Skype) या व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित को एक नकली 'पुलिस स्टेशन' वाले सेटअप में बैठा अधिकारी दिखाया जाता था। पीड़ित को घर से बाहर निकलने या किसी को फोन करने से मना कर दिया जाता था, जिसे वे 'डिजिटल अरेस्ट' कहते थे।
खाते की जांच के नाम पर लूट: अधिकारी बनकर वे पीड़ित को झांसा देते थे कि उनके बैंक खातों की जांच होनी है। डर के मारे पीड़ित अपनी सारी जमापूंजी ठगों द्वारा बताए गए 'सरकारी' (असल में फर्ज़ी) खातों में ट्रांसफर कर देता था।
गिरफ़्तार आरोपियों का विवरण
मथुरा पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुख़बिर की सूचना पर रिफाइनरी क्षेत्र के पास से इन आरोपियों को दबोचा। गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान इस प्रकार हुई है:
रमेश उर्फ राम बिश्नोई (राजस्थान)राहुल मगलानी, लक्ष्य अग्रवाल और पुनीत सोलंकी (तीनों आगरा निवासी)
गिरोह में शामिल एक महिला, जिसके बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
बरामदगी: पुलिस ने इनके पास से 9 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, 11 बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और फर्ज़ी आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस ने गैंग के 11 बैंक खातों में मौजूद 46 लाख रुपये को तत्काल प्रभाव से होल्ड (Freeze) करा दिया है।
पुलिस का अलर्ट: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई क़ानून नहीं
एसपी (क्राइम) अवनीश कुमार मिश्रा ने जनता को जागरूक करते हुए साफ़ किया है: "भारतीय क़ानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ़्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। अगर आपके पास ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत फोन काट दें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें।"
बचाव के उपाय
क्या करें क्या न करें
अनजान कॉल आने पर तुरंत पहचान सत्यापित करें। डरे नहीं और न ही किसी के दबाव में आएं।
स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें। वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
बैंकिंग विवरण गुप्त रखें। किसी अनजान खाते में पैसा ट्रांसफर न करें।