महोबा: अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ 'बाग़ी' हुए BJP विधायक, मंत्री का काफ़िला रोका

By  Mohd Juber Khan January 31st 2026 12:10 PM

महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में शुक्रवार को सत्ताधारी दल के भीतर का अंतर्विरोध सड़कों पर उतर आया। चरखारी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने क़रीब 100 ग्राम प्रधानों और समर्थकों के साथ जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफ़िले को सागर-कानपुर हाईवे पर रोक दिया।

विवाद की मुख्य वजह: बदहाल सड़कें और प्यासे गांव

विधायक बृजभूषण राजपूत का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'हर घर नल' (जल जीवन मिशन) के तहत उनके क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदी गईं, लेकिन उन्हें दोबारा नहीं बनाया गया।

जनता की नाराज़गी: विधायक ने कहा कि धूल और गड्ढों के कारण ग्रामीणों का चलना दूभर हो गया है।

अधिकारियों पर आरोप: राजपूत ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम अधूरा पड़ा है और वे जनता को जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

धमकी: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 20 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सभी ग्राम प्रधानों के साथ लखनऊ में धरना देंगे।

पुलिस से झड़प और तीख़ी बहस

मंत्री का काफ़िला रुकते ही मौके पर अफ़रा-तफ़री मच गई। जब पुलिस कर्मियों और सुरक्षाबलों ने रास्ता साफ़ कराने की कोशिश की, तो विधायक के समर्थकों के साथ उनकी तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विधायक मंत्री की गाड़ी के बोनट को थपथपाते हुए और तीखे सवाल पूछते नज़र आ रहे हैं।

विधायक: "लाइन से 40 गांव हैं, आप कितने में जाओगे? जनता हमसे जवाब मांगती है।" मंत्री स्वतंत्र देव सिंह: "मैं अभी 40 गांवों में जाने को तैयार हूं। अगर कहीं काम ख़राब मिला, तो मैं तुरंत अधिकारियों को सस्पेंड कर दूंगा।"

विपक्ष ने साधा निशाना

इस घटना ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौक़ा दे दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:

"डबल इंजन के डिब्बे आपस में ही टकरा रहे हैं। जब भाजपा के विधायक ही अपने मंत्री को 'बंधक' बना रहे हैं, तो समझा जा सकता है कि राज्य में विकास की क्या स्थिति है।"

निष्कर्ष और कार्रवाई

काफ़ी देर तक चले हंगामे के बाद, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विधायक को अपनी गाड़ी में बैठाया और वे ज़िलाधिकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचे। वहां अधिकारियों के साथ हुई लंबी बैठक के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और दोषी ठेकेदारों व इंजीनियरों पर सख़्त कार्रवाई होगी।

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