उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव के खिलाफ UGC की नई गाइडलाइंस: सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद ने किया पुरज़ोर समर्थन
नई दिल्ली: उच्च शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी 'समानता विनियम 2026' पर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। इस बीच, आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद ने इन दिशानिर्देशों का पुरज़ोर समर्थन किया है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने विरोध करने वालों पर निशाना साधा और इसे शोषित वर्गों के लिए सुरक्षा कवच बताया।
"दर्द वही समझ सकता है, जिसने इसे सहा हो"
सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद ने शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले भेदभाव पर गहरा दुख ज़ाहिर करते हुए कहा कि बाहर से इसे समझना मुश्किल है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा:
"SC-ST और OBC होने का दर्द वही व्यक्ति समझ सकता है जिसने इस अपमान और अलगाव को सहा हो। यह गाइडलाइन किसी व्यक्ति विशेष ने नहीं, बल्कि एक विशेषज्ञ समिति ने बनाई है। संस्थानों में जिस तरह से लगातार आत्महत्याओं और अपराधों की संख्या बढ़ रही है, उसके आधार पर ये सख़्त नियम जरूरी हो गए थे।"
विरोध करने वालों पर उठाए सवाल: "90% ने गाइडलाइन पढ़ी ही नहीं"
चन्द्रशेखर आज़ाद ने उन संगठनों और वर्गों की आलोचना की जो इन नियमों को केवल आरक्षण से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये नियम समावेशी (Inclusive) हैं:
EWS और दिव्यांगों का समावेश: उन्होंने बताया कि इन गाइडलाइंस में केवल SC-ST या OBC ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमज़ोर (EWS) बच्चों और दिव्यांग जनों को भी जोड़ा गया है।
भ्रम की स्थिति: लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के मुताबिक़, विरोध करने वाले ज़्यादातर लोगों ने मसौदे को पूरी तरह पढ़ा नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों (EWS) को भी इसका लाभ मिल रहा है, तो फिर विरोध का आधार क्या है?
क्या हैं UGC की नई गाइडलाइंस (समानता विनियम 2026)?
यूजीसी ने 2012 के पुराने नियमों की जगह 15 जनवरी 2026 से नए नियम लागू किए हैं। इनकी मुख्य विशेषताएं हैं:
सख्त जुर्माना: भेदभाव के दोषी पाए जाने वाले संस्थानों की फंडिंग रोकी जा सकती है और उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल: हर विश्वविद्यालय में एक सक्रिय सेल बनाना अनिवार्य होगा।
मानसिक स्वास्थ्य: हाशिए पर रहने वाले छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुसाइड प्रिवेंशन के लिए विशेष प्रोटोकॉल।
राजनीतिक गर्माहट
जहां एक ओर चन्द्रशेखर आज़ाद और बहुजन संगठनों ने इसे 'ऐतिहासिक' बताया है, वहीं कुछ सवर्ण संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए इसके ख़िलाफ़ अदालती कार्यवाही की चेतावनी दी है। चन्द्रशेखर आज़ाद ने साफ़ किया कि अगर इन नियमों को कमज़ोर करने की कोशिश की गई, तो वह सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।