BMC चुनाव 2026: AIMIM की 125 सीटों पर जीत के बाद ओवैसी ने जताया जनता का आभार
हैदराबाद/मुंबई: महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण पेश किया है। इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अब तक का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 125 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी की इस सफ़लता पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र की जनता और अपने कार्यकर्ताओं को बधाई दी है।
ओवैसी का बयान: "यह कड़ी मेहनत का परिणाम"
हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा,
"मैं महाराष्ट्र में 125 AIMIM पार्षदों की जीत के लिए महाराष्ट्र के लोगों को तहे दिल से धन्यवाद देता हूं, मैं हमारे महाराष्ट्र अध्यक्ष (इम्तियाज जलील) और सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं का शुक्रगुज़ार हूं, यह नतीजा सभी की दिन-रात की कड़ी मेहनत का परिणाम है, मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे नवनिर्वाचित पार्षद जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे और विकास के कार्यों को प्राथमिकता देंगे।"
चुनावी प्रदर्शन के मुख्य बिंदु
एआईएमआईएम ने इस बार पिछले चुनावों (56 सीटें) के मुक़ाबले अपनी ताक़त को दोगुने से भी ज़्यादा कर लिया है। पार्टी न केवल अपने पुराने गढ़ों को बचाने में सफ़ल रही, बल्कि नए इलाक़ों में भी पैठ बनाई है:
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): यहां पार्टी ने 33 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है।
मालेगांव: पार्टी ने यहां 21 सीटों पर क़ब्ज़ा जमाया।
नांदेड़-वाघाला: कांग्रेस के इस पुराने गढ़ में सेंध लगाते हुए AIMIM ने 15 सीटें जीतीं।
मुंबई (BMC): देश की सबसे अमीर नगर पालिका में भी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और 8 सीटों पर जीत हासिल की।
अन्य शहर: अमरावती (14), धुले (10), सोलापुर (8) और नागपुर (7) में भी पार्टी ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।
AIMIM की जीत के राजनीतिक मायने
जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन (MVA) और सत्ताधारी महायुति के बीच चल रही खींचतान के बीच ओवैसी की पार्टी ने 'तीसरे विकल्प' के रूप में ख़ुद को मज़बूती से पेश किया है। पार्टी ने न केवल मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जीत हासिल की, बल्कि दलित और अन्य पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों को उतारकर अपने 'जय भीम-जय मीम' के नारे को भी धरातल पर उतारा है।
क्या है AIMIM के लिए आगे की राह?
125 पार्षदों की इस जीत के साथ AIMIM अब कई नगर निगमों में 'किंगमेकर' की भूमिका में आ गई है। विशेष रूप से उन शहरों में जहां किसी भी बड़े गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहाँ मेयर बनाने में ओवैसी की पार्टी का रुख़ निर्णायक होगा।