बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया की गंभीर हालत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताई चिंता
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष बेग़म ख़ालिदा ज़िया की तबीयत बेहद नाज़ुक बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक़ राजधानी ढाका के एवरकेयर अस्पताल में उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) पर रखा गया है। उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख ज़ाहिर किया है और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए हर मुमकिन मदद मुहैया करने की पेशकश की है।
वेंटिलेटर पर हैं ख़ालिदा ज़िया
आपको बता दें कि 80 वर्षीय ख़ालिदा ज़िया को सीने में संक्रमण और फेफड़ों की जटिलताओं के चलते 23 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई बीमारियों जैसे हृदय रोग, मधुमेह, गठिया और गुर्दे की समस्याओं से जूझ रहीं ज़िया की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) में शिफ्ट कर दिया गया और वे अब वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। उनकी देखभाल स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम कर रही है। बीएनपी के नेताओं ने उनकी स्थिति को 'बहुत नाज़ुक' बताया है और पूरे देश से उनके लिए दुआ करने की अपील की है।
पीएम मोदी का संवेदना भरा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, "बांग्लादेश के सार्वजनिक जीवन में कई वर्षों तक योगदान देने वाली बेग़म ख़ालिदा ज़िया के स्वास्थ्य के बारे में जानकर गहरी चिंता हुई। उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हमारी हार्दिक प्रार्थनाएं और शुभकामनाएं हैं। भारत हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है, जिस तरह से हम कर सकते हैं।"
बीएनपी ने जताया आभार
भारतीय प्रधानमंत्री के इस मानवीय और संवेदनशील संदेश पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आभार व्यक्त किया है। बीएनपी ने एक बयान जारी कर पीएम मोदी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करने और सहायता की पेशकश के लिए धन्यवाद दिया।
बांग्लादेश सरकार ने किया VVIP घोषित
ख़ालिदा ज़िया की स्वास्थ्य की गंभीरता को देखते हुए, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तत्काल प्रभाव से उन्हें वीवीआईपी (अति-अति महत्वपूर्ण व्यक्ति) घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद उन्हें विशेष सुरक्षा बल (SSF) प्रदान करने का रास्ता साफ़ हो गया है। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता के बीच, भारत की ओर से मदद की पेशकश दोनों देशों के बीच मानवीय और राजनीतिक सद्भावना का एक महत्वपूर्ण संकेत है।