हांगकांग में भीषण आग से 44 लोगो की दर्दनाक मौत, सैकड़ों लोग अब भी लापता
GTC International: हांगकांग के ताई पो ज़िले में वांग फुक कोर्ट आवासीय परिसर में बुधवार (26 नवंबर, 2025) को लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 44 हो गई है, जबकि 279 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने इस घटना को दशकों में हांगकांग की सबसे घातक आग बताया है। जानकारी के मुताबिक़ आग बुधवार (26 नवंबर, 2025) दोपहर को शुरू हुई और तेज़ी से कॉम्प्लेक्स के आठ में से सात ऊंची इमारतों तक फैल गई। आग की तीव्रता को देखते हुए इसे लेवल 5 अलार्म (सर्वोच्च आपातकालीन स्तर) पर अपग्रेड कर दिया गया।
अग्निशमन विभाग का क्या कहना है?
अग्निशमन विभाग के बक़ौल, मरने वालों में एक 37 वर्षीय अग्निशमनकर्मी भी शामिल है। कम से कम 62 अग्निशमन विभाग के कर्मचारी घायल हुए हैं, जिनमें से 45 की हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि आग को बाहर लगी बांस की मचान और निर्माण सामग्री, जैसे कि अत्यधिक ज्वलनशील स्टायरोफोम सामग्री, ने तेज़ी से फैलने में मदद की। 800 से अधिक अग्निशमनकर्मी, पुलिस अधिकारी और पैरामेडिक्स बचाव कार्यों में जुटे रहे। तेज़ गर्मी और ढहते मलबे के कारण बचाव दल को ऊपरी मंज़िलों तक पहुँचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सूत्रों की मानें तो लगभग 900 निवासियों को अस्थायी आश्रयों में सुरक्षित निकाला गया है। हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली ने इस घटना को एक 'विशाल आपदा' बताया और कहा कि उनकी प्राथमिकता आग को बुझाना और फंसे हुए निवासियों को बचाना है।
आपराधिक जांच और गिरफ़्तारियां
पुलिस ने लापरवाही बरतने के संदेह में गै़र इरादतन हत्या के आरोप में एक निर्माण कंपनी के तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है। अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कंपनी के ज़िम्मेदार व्यक्तियों की घोर लापरवाही के कारण आग बेक़ाबू तरीके़ से फैली और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ।
राष्ट्रीय शोक और प्रतिक्रिया
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस भीषण त्रासदी पर शोक व्यक्त किया है और हांगकांग के अधिकारियों से जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए "हर संभव प्रयास" करने का आग्रह किया है। इस दुखद घटना के मद्देनज़र, हांगकांग सरकार ने 7 दिसंबर को होने वाले विधान परिषद चुनावों से संबंधित प्रचार गतिविधियों को स्थगित कर दिया है। यह आग हांगकांग में दशकों में हुई सबसे घातक अग्निकांड है, जिसने शहर की घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।