बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन
ढाका: बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन बेगम ख़ालिदा ज़िया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह पिछले लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं।
निधन का विवरण और अंतिम समय
बीएनपी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक़, खालिदा ज़िया ने मंगलवार सुबह लगभग 6:00 बजे ढाका के एवरकेयर अस्पताल (Evercare Hospital) में अंतिम सांस ली।
अस्पताल में भर्ती: उन्हें 23 नवंबर को हृदय और फेफड़ों की समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
गंभीर स्थिति: पिछले कुछ दिनों से उनकी हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई थी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।
बीमारियां: वह लिवर सिरोसिस, मधुमेह, गठिया (arthritis) और किडनी से संबंधित पुरानी बीमारियों से पीड़ित थीं।
बांग्लादेश में 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक
ख़ालिदा ज़िया के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए BNP ने सात दिवसीय आधिकारिक शोक की घोषणा की है। इस दौरान:
पार्टी के केंद्रीय कार्यालय और देश भर के सभी कार्यालयों पर काले झंडे फ़हराए जाएंगे।
कार्यकर्ता अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
देश भर में उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष दुआओं और क़ुरान पाठ का आयोजन किया जाएगा।
पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री की मौत पर गहरा दुख ज़ाहिर किया है।
राहुल गांधी ने भी ख़ालिदा ज़िया के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
ख़ालिदा ज़िया ऐतिहासिक राजनीतिक सफ़र
ख़ालिदा ज़िया का जन्म 1945 में हुआ था। वह बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य प्रमुख ज़ियाउर रहमान की पत्नी थीं। 1981 में पति की हत्या के बाद उन्होंने मजबूरी में राजनीति में क़दम रखा, लेकिन जल्द ही वे देश की सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक बनकर उभरीं।
तीन बार की प्रधानमंत्री: वह 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।
लोकतंत्र के लिए संघर्ष: 1980 के दशक में सैन्य तानाशाही (हुसैन मुहम्मद इरशाद के शासन) के ख़िलाफ़ उन्होंने लंबा आंदोलन चलाया।
'बैटल ऑफ बेगम्स': बांग्लादेश की राजनीति दशकों तक ख़ालिदा ज़िया और उनकी प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना के बीच की प्रतिस्पर्धा के इर्द-गिर्द घूमती रही।
वैश्विक प्रतिक्रिया और आगामी चुनाव
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। वहीं, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने उन्हें "लोकतंत्र का संरक्षक" बताया।
विशेष बात यह है कि ख़ालिदा ज़िया का निधन फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले हुआ है। उनके निधन के बाद अब उनके बड़े बेटे और BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान पर पार्टी की पूरी कमान आ गई है, जो हाल ही में 17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे हैं।
यक़ीनन ख़ालिदा ज़िया का जाना न केवल एक राजनीतिक दल की क्षति है, बल्कि बांग्लादेश के इतिहास के उस अध्याय का समापन है जिसने दक्षिण एशियाई राजनीति की दिशा तय की थी।