16 फरवरी को चंडीगढ़ कोर्ट में पेश होंगे सुखबीर सिंह बादल, जानिए पूरा मामला...

By  Preeti Kamal February 14th 2026 11:45 AM -- Updated: February 14th 2026 01:55 PM

चंडीगढ़, पंजाब: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल 16 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ जिला अदालत में 8 साल पुराने मानहानि मामले में पेश होंगे। सुखबीर सिंह बादल ने 2 फरवरी, 2026 को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए आवेदन दायर किया था। अमृतसर में एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने उस दिन की सुनवाई में पेश होने से छूट मांगी थी।

8 साल  पुराना मानहानि का मामला

यह आवेदन राजिंदर सिंह बनाम सुखबीर सिंह बादल एवं अन्य से जुड़े लगभग 8 वर्ष पुराने मानहानि मामले के संबंध में अदालत में दायर किया गया है। आवेदन में कहा गया है कि 2 फरवरी को अमृतसर में शिरोमणि अकाली दल की पार्टी बैठक बुलाई गई, जिसमें विभिन्न गांवों, शहरों और राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। बैठक में सुखबीर बादल की उपस्थिति आवश्यक बताई गई।


आवेदन में यह भी कहा गया कि यदि सुखबीर बादल बैठक में शामिल नहीं होते हैं, तो दूर-दराज से आए लोगों को बिना किसी परिणाम के वापस लौटना पड़ेगा। आवेदन में स्पष्ट किया गया कि उनकी अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी और वे अगली तारीख पर अदालत में पेश होने का वादा करते हैं।

आखिर क्या है पूरा मामला

अखंड कीर्तनी जत्था के प्रवक्ता और मोहाली निवासी राजिंदर पाल सिंह ने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चंडीगढ़ जिला कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) के तहत दायर की गई। 4 जनवरी 2017 को, दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर जाने के बाद सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया में बयान दिया था। आरोप है कि उस बयान में अखंड कीर्तनी जत्था को प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक फ्रंट बताया गया।

शिकायतकर्ता ने दावा कि संगठन की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा

सुखबीर सिंह बादल के बयान से संगठन की छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर मानहानि का केस दायर किया गया। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार,पेशी पर उपस्थित न होने के कारण पहले गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए थे। पेश न होने पर जारी गैर-जमानती वारंट जारी हुए। 17 दिसंबर 2025 को कोर्ट के आदेश के बावजूद सुखबीर सिंह बादल पेश नहीं हुए।


इसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल गर्ग की अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिए। सख्त कार्रवाई की आशंका के चलते बाद में वे अदालत में पेश हुए, जहां उन्हें दोबारा जमानत मिल गई।

सुखबीर सिंह बादल की याचिका हाईकोर्ट में खारिज

मामले को रद्द करवाने के लिए सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद यह केस चंडीगढ़ जिला कोर्ट में ही जारी है। यह मामला वर्ष 2017 के उस कथित बयान से जुड़ा है, जिसमें अखंड कीर्तनी जत्था को प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक फ्रंट बताया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा।

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