राजधानी बनी 'स्मॉग कैपिटल': दिल्ली-NCR और यूपी के शहरों की हवा 'गंभीर', डरावनी है AQI रिपोर्ट

By  Mohd Juber Khan December 5th 2025 02:36 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर अपने चरम ख़तरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दिल्ली की हवा की गुणवत्ता 'बहुत ख़राब' से 'गंभीर' श्रेणी में बनी हुई है, जिससे यह क्षेत्र अब 'स्मॉग कैपिटल' जैसा दिखने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदूषण की यह भयावह स्थिति न केवल दिल्ली, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों को भी अपनी चपेट में ले चुकी है, जिससे पर्यावरण 'रहने लायक नहीं' बन गया है।

दिल्ली-एनसीआर में AQI की डरावनी स्थिति

दिल्ली और उसके आस-पास के शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 350 से 450 के बीच बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत ख़तरनाक है।

गंभीर स्तर: दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर AQI 400 के पार दर्ज किया गया है, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है।

एनसीआर के हालात: दिल्ली से सटे NCR के शहरों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।

नोएडा: AQI 391 के पास, 'गंभीर' श्रेणी की ओर बढ़ रहा है।

ग़ाज़ियाबाद: AQI 358 दर्ज किया गया।

ग्रेटर नोएडा: AQI 381 दर्ज किया गया।

AQI स्तर का मतलब: 401-500 के बीच का AQI 'गंभीर' (Severe) माना जाता है। इस स्तर पर स्वस्थ लोग भी प्रभावित होते हैं और पहले से बीमार लोगों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

यूपी के शहरों की हवा भी 'ज़हरीली'

दिल्ली से बाहर उत्तर प्रदेश के कई शहर भी इस वायु प्रदूषण संकट का सामना कर रहे हैं। ग़ाज़ियाबाद और नोएडा जैसे NCR के शहरों के अलावा राज्य के अन्य शहर भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहे हैं।

प्रमुख प्रदूषित शहर: पिछले रिकॉर्ड और वर्तमान ट्रेंड्स के अनुसार, ग़ाज़ियाबाद, नोएडा, मेरठ, हापुड़, और मुजफ्फरनगर जैसे शहर अक्सर 'बहुत ख़राब' से 'गंभीर' श्रेणी के बीच बने रहते हैं।

अन्य शहर: कुछ रिपोर्टों में जौनपुर, बाग़पत, और वाराणसी जैसे शहरों में भी प्रदूषण का उच्च स्तर दर्ज किया गया है, जो राज्यव्यापी संकट की ओर इशारा करता है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

प्रदूषण के इस भयावह स्तर के लिए मौसमी परिस्थितियाँ और मानवजनित गतिविधियाँ दोनों ज़िम्मेदार हैं:

प्रतिकूल मौसम: तापमान में गिरावट और हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) निचले वातावरण में ही फंस जाते हैं। स्मॉग (धुंध और धुएं का मिश्रण) की चादर शहर पर छा जाती है।

वाहनों का प्रदूषण: डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोतों में परिवहन (Transportation) का योगदान 18% से अधिक रहा है।

पड़ोसी राज्यों की पराली: हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर कड़ी टिप्पणी की है, लेकिन यह अभी भी क्षेत्रीय प्रदूषण का एक कारक बना हुआ है।

अन्य स्रोत: धूल (सड़क की धूल और निर्माण कार्य), उद्योग और डीजल जनरेटर जैसे अन्य स्रोत भी प्रदूषण में बड़ा योगदान दे रहे हैं। शादियों के मौसम में आतिशबाजी भी हवा को और ख़राब कर रही है।

स्वास्थ्य पर घातक असर

ज़हरीली हवा के कारण दिल्ली-एनसीआर और यूपी के निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर ख़तरा मंडरा रहा है।

तत्काल प्रभाव: सर्वेक्षणों के अनुसार, 80% से अधिक निवासी पुरानी खांसी, गले में जलन, आंखों में पानी आना और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

दीर्घकालिक प्रभाव: डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक पहुँचकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के कैंसर का ख़तरा बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, वायु प्रदूषण का हृदय रोगों और यहां तक कि प्रजनन क्षमता पर भी गंभीर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

जीवन प्रत्याशा में कमी: विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इतनी ज़हरीली हवा में रहना औसतन एक दिन में 10-12 सिगरेट पीने के बराबर है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस 'गंभीर' स्थिति पर सख़्त रुख़ अपनाया है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को सख्ती से लागू करने पर ज़ोर दिया है।

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