4 दिसंबर: नौसेना दिवस - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सराहा भारतीय नौसेना का शौर्य
GTC News: हर साल 4 दिसंबर को भारत में 'भारतीय नौसेना दिवस' (Indian Navy Day) मनाया जाता है। यह दिन देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में भारतीय नौसेना के अदम्य साहस, समर्पण और उसकी निर्णायक भूमिका को समर्पित है। यह दिवस विशेष रूप से 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में नौसेना द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' की शानदार सफलता का जश्न मनाने के लिए चुना गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी बधाई
नौसेना दिवस के अवसर पर, भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर, द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय नौसेना के सभी कर्मियों और उनके परिवारों को बधाई दी।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा:
"नौसेना दिवस पर, मैं भारतीय नौसेना के सभी वीर कर्मियों को बधाई देती हूँ। नौसेना न केवल हमारी समुद्री सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के अदम्य साहस और शौर्य की गौरवशाली परंपरा को निभाते हुए, नौसेना ने हमेशा राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। उनका समर्पण 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को दर्शाता है।"
नौसेना दिवस का इतिहास: ऑपरेशन ट्राइडेंट
भारतीय नौसेना दिवस 4 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है, इसका सीधा संबंध 1971 के भारत-पाक युद्ध की एक निर्णायक घटना से है।
क्या है ऑपरेशन ट्राइडेंट?
4 दिसंबर 1971 की रात को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट शुरू किया।
इस ऑपरेशन में, भारतीय नौसेना ने अपने शक्तिशाली युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए, पश्चिमी पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डे, कराची बंदरगाह पर हमला किया।
यह नौसैनिक युद्ध के इतिहास में जहाज़-रोधी मिसाइलों (Anti-Ship Missiles) का पहला उपयोग था।
भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर भीषण हमला किया, जिससे पाकिस्तान के कई युद्धपोत, तेल भंडार और मालवाहक जहाज पूरी तरह से तबाह हो गए। यह ऑपरेशन भारतीय नौसेना के लिए बिना किसी नुकसान के एक बड़ी जीत थी।
इस ऐतिहासिक सफ़लता और नौसेना के शौर्य को श्रद्धांजलि देने के लिए, हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है।
भारतीय नौसेना का महत्व और वर्तमान भूमिका
भारतीय नौसेना न केवल देश की रक्षा में बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापार की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है:
समुद्री सीमाओं की सुरक्षा: भारत की 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और हिंद महासागर क्षेत्र में इसके सामरिक हितों की रक्षा करना नौसेना का प्राथमिक कार्य है।
HADR मिशन: शांति के समय साइक्लोन, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत और बचाव अभियान चलाती है।
आत्मनिर्भरता: नौसेना स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा देने में सबसे आगे रही है, जिसका उदाहरण देश में ही निर्मित आईएनएस विक्रांत जैसे विमान वाहक पोत हैं।
भारतीय नौसेना के समारोह और परंपराएँ
नौसेना दिवस के अवसर पर देश भर में नौसेना अपनी शक्ति और कौशल का प्रदर्शन करती है।
भव्य प्रदर्शन: हर साल, नौसेना की तीनों कमान - पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी - मुख्यालयों पर विभिन्न समारोह आयोजित किए जाते हैं।
ऑपरेशनल प्रदर्शन: मुख्य समारोह में युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानों का 'ऑपरेशनल डिस्प्ले' होता है, जिसमें नौसैनिक युद्ध अभ्यास का प्रदर्शन करते हैं।
श्रद्धांजलि: इस दिन युद्ध स्मारकों पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।