ओडिशा: 22 नक्सलियों ने डाले हथियार, "हिंसा छोड़ें, सरकार पुनर्वास के लिए तैयार"
GTC News: ओडिशा में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों को आज एक बड़ी सफ़लता मिली है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) योगेश बहादुर खुराना ने जानकारी दी कि 22 सक्रिय नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव का नतीजा माना जा रहा है।
आधुनिक हथियारों का ज़खीरा सौंपा
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने अपने साथ अत्याधुनिक हथियारों का ज़खीरा भी पुलिस के हवाले किया है। DGP खुराना के अनुसार, सौंपे गए हथियारों में शामिल हैं:
AK सीरीज़ की राइफ़लें
INSAS (Indian Small Arms System) राइफ़लें
अन्य विस्फ़ोटक और संचार उपकरण
DGP योगेश बहादुर खुराना ने कहा, "इन हथियारों का सरेंडर करना इस बात का सबूत है कि नक्सली अब संगठन के भीतर खोखली विचारधारा और हिंसा से तंग आ चुके हैं।"
डीजीपी ने की ये अपील: "मुख्यधारा में लौटें"
प्रेस वार्ता के दौरान DGP योगेश बहादुर खुराना ने अन्य नक्सलियों से भी भावुक और कड़ी अपील की। उन्होंने कहा: "मैं उन सभी से अपील करता हूं जो अभी भी जंगलों में हैं और हिंसा का रास्ता अपनाए हुए हैं—वापस आएं और मुख्यधारा में शामिल हों। सरकार ने आपके पुनर्वास के लिए बेहतरीन इंतज़ाम किए हैं। बंदूक से नहीं, बल्कि विकास से बदलाव आता है।"
नई पुनर्वास नीति का असर
हाल ही में ओडिशा सरकार ने अपनी नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिसने नक्सलियों को हथियार डालने के लिए प्रोत्साहित किया है:
मद (Item) नई प्रोत्साहन राशि (Revised Reward)
शीर्ष नेता (Category A) ₹5 लाख तक की आर्थिक सहायता
AK-47 राइफल ₹3.3 लाख प्रति हथियार
INSAS/SLR राइफल ₹1.65 लाख प्रति हथियार
आवास सहायता अंत्योदय गृह योजना के तहत घर
इसके अलावा, आत्मसमर्पण करने वालों को कौशल विकास प्रशिक्षण, मुफ्त राशन कार्ड और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष छात्रवृत्ति की सुविधा भी दी जा रही है।
मार्च 2026 तक 'नक्सल मुक्त' ओडिशा का लक्ष्य
DGP योगेश बहादुर खुराना ने दोहराया कि गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार, ओडिशा पुलिस ने 31 मार्च, 2026 तक राज्य को पूरी तरह से नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। सुरक्षा बल न केवल सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच जागरूकता फैलाकर नक्सलियों के आधार को कमजोर करने का काम भी कर रहे हैं।