77वां गणतंत्र दिवस: यूरोपियन यूनियन ने भी माना भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का लोहा
नई दिल्ली: भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मना रहा है। देश की राजधानी दिल्ली के 'कर्तव्य पथ' पर आयोजित भव्य परेड में जहां एक ओर भारत की उभरती सैन्य शक्ति और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता की झलक भी देखने को मिली। इस वर्ष का समारोह रणनीतिक और राजनयिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा।
नेशनल वॉर मेमोरियल पर वीरों को नमन
गणतंत्र दिवस समारोह की औपचारिक शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) पहुंचने के साथ हुई। प्रधानमंत्री ने वहां अमर चक्र पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुख (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) भी उपस्थित रहे।
शहीदों को नमन करने के बाद प्रधानमंत्री कर्तव्य पथ पहुंचे, जहां उन्होंने परेड देखने आए नागरिकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।
यूरोपीय संघ के दिग्गज बने मुख्य अतिथि
इस वर्ष का गणतंत्र दिवस भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच गहराते संबंधों का प्रतीक बना। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दो प्रमुख वैश्विक नेता शामिल हुए:
एंटोनियो कोस्टा: यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष।
उर्सूला वॉन डेर लेयन: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष।
इन नेताओं की उपस्थिति ने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी, विशेष रूप से व्यापार, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को एक नई ऊंचाई दी है।
कर्तव्य पथ पर परेड की मुख्य विशेषताएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराया और परेड की सलामी ली। इस वर्ष की परेड में कई 'प्रथम' और अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया:
वंदे मातरम के 150 वर्ष: इस बार की थीम 'वंदे मातरम' के 150 वर्षों के उपलक्ष्य पर आधारित रही।
सैन्य शक्ति का प्रदर्शन: स्वदेशी रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, आकाश वेपन सिस्टम और पहली बार 'सूर्यास्त्र' रॉकेट सिस्टम ने कर्तव्य पथ पर अपनी धमक दिखाई।
झांकियां: विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों ने भारत की विरासत और 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को प्रदर्शित किया।
प्रधानमंत्री का संदेश
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व हमारी लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। उन्होंने आह्वान किया कि 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना के साथ हम आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की ओर क़दम बढ़ाएं।