8 जनवरी: पृथ्वी घूर्णन दिवस - वह दिन जब दुनिया ने अपनी गति को पहचाना

By  Mohd Juber Khan January 8th 2026 01:25 PM

GTC News: हर साल 8 जनवरी को दुनिया भर में 'पृथ्वी घूर्णन दिवस' (Earth's Rotation Day) मनाया जाता है। यह दिन न केवल हमारे ग्रह की निरंतर गति का जश्न मनाता है, बल्कि उस वैज्ञानिक खोज को भी सम्मान देता है जिसने मानव इतिहास में पहली बार यह प्रत्यक्ष प्रमाण दिया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।

वैसे क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप जिस ज़मीन पर खड़े हैं, वह 1,600 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से घूम रही है? हमें यह गति महसूस नहीं होती, लेकिन इसी गति की वजह से शायद हमारा जीवन मुमकिन है। 8 जनवरी का दिन इसी 'घूर्णन' (Rotation) के रहस्य को सुलझाने वाले फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फूको (Léon Foucault) के ऐतिहासिक प्रयोग को समर्पित है।

इतिहास: फूको का लोलक और 1851 का वह प्रयोग

1851 में आज ही के दिन लियोन फूको ने पेरिस के पैनथियन (Panthéon) की छत से एक 67 मीटर लंबे तार के सहारे 28 किलोग्राम का पीतल का गोला लटकाया था। इसे 'फूको का लोलक' (Foucault’s Pendulum) कहा जाता है।

वैज्ञानिक रहस्य: फूको ने दिखाया कि जैसे-जैसे लोलक (Pendulum) झूलता है, उसका झूलने का तल (Plane of oscillation) धीरे-धीरे बदलता हुआ प्रतीत होता है। वास्तव में, लोलक का तल स्थिर रहता है, लेकिन उसके नीचे की पृथ्वी घूम रही होती है। यह पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने का पहला प्रत्यक्ष प्रयोगशाला प्रमाण था।

पृथ्वी का घूर्णन: दिन-रात और समय का चक्र

पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:

दिन और रात: घूर्णन के कारण ही पृथ्वी का जो हिस्सा सूर्य के सामने होता है वहां दिन होता है, और विपरीत हिस्से में रात।

24 घंटे का चक्र: पृथ्वी एक चक्कर पूरा करने में लगभग 23 घंटे, 56 मिनट और 4 सेकंड का समय लेती है।

समय का निर्धारण: दुनिया भर के टाइम ज़ोन (Time Zones) इसी घूर्णन गति के आधार पर तय किए गए हैं।

चंद्रमा और घूर्णन का गहरा संबंध

पृथ्वी का घूर्णन और चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

ज्वार-भाटा (Tides): चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और पृथ्वी के घूर्णन के तालमेल से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है।

गति का धीमा होना: वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा के प्रभाव के कारण पृथ्वी की घूर्णन गति बहुत धीमी गति से (करोड़ों वर्षों में) कम हो रही है, जिससे दिन की लंबाई धीरे-धीरे बढ़ रही है।

जलवायु परिवर्तन और कोरिओलिस प्रभाव (Coriolis Effect)

पृथ्वी का घूमना केवल समय के लिए ही नहीं, बल्कि मौसम के लिए भी अनिवार्य है।

हवाओं की दिशा: घूर्णन के कारण 'कोरिओलिस बल' पैदा होता है, जो हवाओं को उत्तर में दाईं ओर और दक्षिण में बाईं ओर मोड़ देता है। इसी से चक्रवात और समुद्री धाराएं बनती हैं।


जलवायु संतुलन: यदि पृथ्वी घूमना बंद कर दे, तो वायुमंडल का संतुलन बिगड़ जाएगा। एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ जमा देने वाली ठंड होगी, जिससे जीवन समाप्त हो सकता है।


आधुनिक भारत और फूको का लोलक


आज भी फूको का लोलक विज्ञान के प्रति हमारी जिज्ञासा का प्रतीक है। भारत के नए संसद भवन (Constitutional Hall) में भी एक विशाल 'फूको लोलक' स्थापित किया गया है, जो न केवल ब्रह्मांड के साथ भारत के जुड़ाव को दर्शाता है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का भी प्रतीक है।


बहरहाल कहा जा सकता है कि पृथ्वी घूर्णन दिवस हमें यह याद दिलाने का अवसर है कि हम एक ऐसे विशाल अंतरिक्ष यान (पृथ्वी) पर सवार हैं जो कभी नहीं रुकता। लियोन फूको का वह साधारण सा पेंडुलम आज भी हमें याद दिलाता है कि सत्य अक्सर हमारी आंखों के सामने होता है, बस उसे देखने के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टि की आवश्यकता होती है।


अगली बार जब आप सूर्योदय देखें, तो याद रखें—सूरज नहीं उगा है, बल्कि आपकी पृथ्वी ने आपको उसकी ओर घुमाया है!

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