भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी का क़हर: 3 की मौत, 150 से ज़्यादा बीमार
इंदौर: भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही दूषित पानी की सप्लाई ने एक भयावह रूप ले लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 149 से ज़्यादा लोग उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के कारण शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। स्थानीय निवासियों का दावा है कि मौतों का आंकड़ा इससे ज़्यादा भी हो सकता है।
घटना का मुख्य कारण: सीवेज का पानी पाइपलाइन में मिला
जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा के पुलिस चेक पोस्ट के पास मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पाइपलाइन के ठीक ऊपर एक शौचालय का निर्माण किया गया था, जिसका अपशिष्ट सीधे पीने के पानी की लाइन में मिल रहा था। 25 दिसंबर को सप्लाई किए गए पानी में स्थानीय लोगों ने अजीब गंध और धुंधलेपन की शिकायत की थी, जिसे प्रशासन ने समय रहते गंभीरता से नहीं लिया।
प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य
हालात के मद्देनज़र इंदौर के ज़़िलाधिकारी (DM) और नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव ने प्रभावित इलाक़े का दौरा किया। प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:
मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस: इलाके में डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। मामूली लक्षण वाले 1,146 लोगों का मौके़ पर ही इलाज किया गया है, जबकि गंभीर मरीजों के लिए एम्बुलेंस सेवा 24 घंटे उपलब्ध कराई गई है।
साफ़ पानी की सप्लाई: प्रभावित क्षेत्र में नल से पानी की सप्लाई रोक दी गई है और अब नगर निगम के टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ जल घर-घर पहुंचाया जा रहा है।
दोषियों पर कार्रवाई: मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और सहायक इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
मुआवजे़ की घोषणा: सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता और सभी मरीजों के मुफ़्त इलाज की घोषणा की है।
इंदौर जल संकट: एक नज़र में
विवरण आंकड़े/जानकारी
प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरा, इंदौर
मृतकों की संख्या 3 (आधिकारिक), स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार 7-8
अस्पताल में भर्ती लगभग 149-150 मरीज़
प्रदूषण का स्रोत नर्मदा पाइपलाइन में सीवेज का रिसाव
सरकारी सहायता ₹2 लाख मुआवज़ा और मुफ़्त चिकित्सा
मेयर पुष्यमित्र भार्गव का बयान: "यह बेहद दुखद घटना है। प्रथम दृष्टया यह नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही का मामला है। हम इसकी गहन जांच करा रहे हैं और किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा।"