गंदे पानी ने छीनी 15 ज़िंदगी, 200 से ज़्यादा अस्पताल में भर्ती, लापरवाह अफ़सरों पर गिरी गाज़

By  Mohd Juber Khan January 3rd 2026 04:30 PM

इंदौर: स्वच्छता में सात बार देश में नंबर-1 रहने वाले शहर इंदौर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा इलाक़े में सीवरेज मिश्रित दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण मरने वालों का आंकड़ा 15 तक पहुंच गया है। हालांकि, प्रशासन आधिकारिक तौर पर मौतों की संख्या कम बता रहा है, लेकिन स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। फ़िलहाल क़रीब 200 लोग अलग-अलग अस्पतालों में ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, जिनमें से 32 मरीज़ आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं।

कैसे 'अमृत' बना 'ज़हर'?

प्रारंभिक जांच और लैब रिपोर्ट में यह ख़ुलासा हुआ है कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास एक सार्वजनिक शौचालय की पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण मल-मूत्र वाला पानी मुख्य पेयजल पाइपलाइन में मिल गया।

बड़ी लापरवाही: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वे पिछले कई हफ़्तों से पानी में दुर्गंध और मटमैलेपन की शिकायत नगर निगम से कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया।

बीमारी का प्रकोप: दूषित पानी के सेवन से पूरे इलाके में उल्टी, दस्त और हैजा जैसे लक्षण फैल गए। अब तक 1,400 से ज़्यादा लोग इसके प्रभाव में आ चुके हैं।

मासूम की मौत: मृतकों में एक 6 महीने का बच्चा भी शामिल है, जिसकी मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है।

मुख्यमंत्री का दौरा और सख़्त कार्रवाई

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर पहुंचकर अस्पताल में भर्ती मरीज़ों से मुलाक़ात की और उनके उपचार के निर्देश दिए।

उन्होंने घटना को 'अत्यधिक दुखद' और 'अक्षम्य' बताते हुए प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया है:

नगर निगम कमिश्नर पर गाज़: मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

निलंबन: अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और जनस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है।

वित्तीय सहायता: सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ़्त इलाज की घोषणा की है।

ज़मीनी हालात: ख़ौफ़ में भागीरथपुरा

वर्तमान में भागीरथपुरा में पेयजल की पाइपलाइन को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पूरे क्षेत्र में नगर निगम के टैंकरों के ज़रिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और ओआरएस (ORS) के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं।

विवरण                                          सांख्यिकी (अनुमानित)

कुल मौतें                                      15 (निजी/स्थानीय दावा)

अस्पताल में भर्ती                       200

आईसीयू (ICU) में मरीज़         32

प्रभावित परिवार                       2,700 से अधिक

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

जबलपुर हाईकोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है। सरकार द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है, क्योंकि सरकारी आंकड़ों और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होनी है।"स्वच्छता के तमगे के पीछे छिपी यह लापरवाही प्रशासनिक तंत्र की विफलता को दर्शाती है। जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, न्याय अधूरा है।" — स्थानीय पार्षद का बयान।

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