उन्नाव बलात्कार मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को किया निलंबित

By:  Mohd Juber Khan December 24th 2025 12:44 PM

GTC News: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 दिसंबर) को एक महत्वपूर्ण फैसले में उन्नाव बलात्कार मामले के मुख्य दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सेंगर को सुनाई गई उम्रकै़द की सज़ा को उसकी अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है और उसे सशर्त ज़मानत दे दी है।

कोर्ट का फैसला और पीठ

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन की खंडपीठ ने सेंगर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सेंगर ने 2019 में ट्रायल कोर्ट (तीस हज़ारी कोर्ट) द्वारा दी गई उम्रकै़द की सज़ा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने माना कि चूंकि अपील पर अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है और सेंगर पहले ही 7 साल से अधिक का समय जेल में बिता चुका है, इसलिए उसकी सजा को निलंबित किया जाना उचित है।

सज़ा निलंबन की कड़ी शर्तें

अदालत ने सेंगर को ज़मानत देते हुए सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कई सख़्त शर्तें लगाई हैं:

आर्थिक मुचलका: सेंगर को 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के तीन दिल्ली स्थित ज़मानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया है।

दूरी बनाए रखना: सेंगर पीड़िता के दिल्ली स्थित निवास के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं आ सकेगा।

शहर से बाहर जाने पर रोक: उसे अपील लंबित रहने तक दिल्ली में ही रहने और अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया गया है।

पुलिस हाज़िरी: उसे हर सोमवार सुबह 10 बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना होगा।

धमकी या प्रभाव: कोर्ट ने सख़्त चेतावनी दी है कि वह पीड़िता या उसकी मां को किसी भी तरह से धमकाने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।

क्या जेल से बाहर आएंगे सेंगर?

सज़ा निलंबित होने के बावजूद कुलदीप सिंह सेंगर की तुरंत रिहाई मुमकिन नहीं है। इसका कारण यह है कि वह पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के एक अन्य मामले में भी 10 साल की सज़ा काट रहा है। उस मामले में भी उसकी सज़ा के निलंबन की अपील लंबित है।

क्या है इस मामले की पूरी पृष्ठभूमि?

यह मामला 2017 का है जब एक नाबालिग लड़की ने कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफ़र किया गया था। दिसंबर 2019 में दिल्ली की अदालत ने सेंगर को आईपीसी और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकै़द की सज़ा सुनाई थी और उस पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

बहरहाल, अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी, 2026 को करेगी।

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