एसआईआर में लापरवाही: यूपी के कई ज़िलों में बीएलओ के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज

By  Mohd Juber Khan November 28th 2025 01:20 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के दौरान कार्य में लापरवाही और आधिकारिक आदेशों की अवहेलना के आरोप में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) सहित कई सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख़्च कार्रवाई की जा रही है। निर्वाचन प्रक्रिया की गंभीरता को देखते हुए, राज्य के कई ज़िलों में अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं, जबकि कई कर्मचारियों का वेतन भी रोका गया है।

कई ज़िलों में सख्त कार्रवाई

राज्य भर के ज़िला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) ने एसआईआर कार्य में धीमी प्रगति और उदासीनता बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख़ अपनाया है।

नोएडा और ग़ाज़ियाबाद: सूत्रों के मुताबिक़, नोएडा में 60 से अधिक बीएलओ और 7 पर्यवेक्षकों (सुपरवाइज़र) के ख़िलाफ़ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसी तरह, ग़ाज़ियाबाद में भी 21 से अधिक बीएलओ पर गणना प्रपत्रों के वितरण और रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन में लापरवाही के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं।

सहारनपुर: नगर मजिस्ट्रेट ने एसआईआर में लापरवाही बरतने के आरोप में एक बीएलओ के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया, क्योंकि उन्होंने गणना प्रपत्रों का वितरण केवल 68.35% ही किया था, जिसे निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अवहेलना माना गया।

बदायूं और प्रयागराज: बदायूं में 100 से अधिक बीएलओ का वेतन रोका गया है और एफआईआर के निर्देश दिए गए हैं। प्रयागराज में भी लापरवाही बरतने वाले 40 बीएलओ का वेतन रोकने का आदेश दिया गया है।

बहराइच और कन्नौज: बहराइच में दो बीएलओ को निलंबित किया गया, जबकि कन्नौज में 54 बीएलओ को चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं।

हमीरपुर: ज़िलाधिकारी ने एसआईआर कार्य की धीमी गति पर 17 पर्यवेक्षकों का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया।

क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया गया एक समयबद्ध घर-घर सत्यापन अभियान है। इसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और अद्यतन बनाना है। बीएलओ को नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 और स्थानांतरण या संशोधन के लिए फॉर्म 8 भरने सहित मतदाताओं की जानकारी का भौतिक सत्यापन करना होता है।

कड़ी कार्रवाई का आधार

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चुनाव संबंधी इस अति-महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की उदासीनता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत मतदाता सूची के कार्य में जानबूझकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारी को 3 महीने से लेकर 2 साल तक की कै़द या जुर्माना हो सकता है।

ज़िलाधिकारी लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और लापरवाह कर्मचारियों पर न केवल दंडात्मक कार्रवाई कर रहे हैं, बल्कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले बीएलओ को सम्मानित भी किया जा रहा है ताकि अभियान समय पर और सफ़लतापूर्वक पूरा हो सके।

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