दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आज़म को 7 साल की सज़ा, ₹50,000 का जुर्माना

By  Mohd Juber Khan December 5th 2025 05:24 PM

रामपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को एक बड़ा झटका लगा है। रामपुर की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने उन्हें फर्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर दो पासपोर्ट रखने के एक मामले में सात साल की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट का फैसला: फर्ज़ीवाड़े को माना गंभीर अपराध

शुक्रवार को सुनाए गए इस अहम फैसले में, अदालत ने फर्जी दस्तावेज़ों और पहचान पत्रों के उपयोग को एक गंभीर अपराध माना है।

सज़ा: 7 साल की कै़द

जुर्माना: ₹50,000 (पचास हज़ार रुपये)

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अभियुक्त द्वारा अब तक हिरासत में बिताई गई अवधि को इस सज़ा में समायोजित कर लिया जाएगा।

क्या था ये पूरा मामला?

यह मामला साल 2019 में दर्ज़ किया गया था, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक आकाश सक्सेना ने रामपुर के सिविल लाइंस थाने में अब्दुल्ला आज़म और उनके पिता आजम ख़ान के ख़िलाफ़ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी।

मुख्य आरोप:

दो अलग-अलग पासपोर्ट: अब्दुल्ला आज़म पर जाली दस्तावेज़ों के आधार पर दो अलग-अलग पासपोर्ट प्राप्त करने और उनका उपयोग करने का आरोप था।

जन्म तिथि में हेर-फे़र: आरोप के अनुसार, एक पासपोर्ट में उनकी जन्म तिथि उनके शैक्षिक रिकॉर्ड के अनुसार 1 जनवरी 1993 थी, जबकि दूसरे पासपोर्ट में इसे बदलकर 1990 दिखाया गया था।

भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने पिता-पुत्र के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी (धारा 420), फर्जी दस्तावेज़ (धारा 467, 468) और पहचान पत्रों में फर्ज़ीवाड़ा (धारा 471) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था।

आज़म परिवार की मुश्किलें बढ़ीं

यह फै़सला आज़म ख़ान परिवार के लिए क़ानूनी मुश्किलों की एक और कड़ी है।

हालिया सज़ाएं: दो सप्ताह पहले ही, आज़म ख़ान और अब्दुल्ला आज़म दोनों को दो पैन कार्ड के एक अन्य मामले में भी सात-सात साल की सज़ा सुनाई गई थी।

अन्य मामले: इससे पहले, वर्ष 2023 में दो जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में भी पिता-पुत्र को सात-सात साल की सज़ा सुनाई जा चुकी है।

 फिलहाल, आज़म ख़ान और अब्दुल्ला आज़म दोनों ही जेल में बंद हैं, और इस नए फै़सले से उनकी क़ानूनी लड़ाई और लंबी खिंच गई है।

आगे क्या होने की है उम्मीद?

इस सज़ा के बाद, अब्दुल्ला आज़म के पास ऊपरी अदालत में इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प मौजूद है। राजनीतिक और कानूनी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज़ हो गई है कि इस फैसले का सपा और आज़म परिवार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।

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