न्याय न मिलने से टूटी उम्मीद: झांसी में महिला किसान ने एसडीएम की गाड़ी पर बरसाए पत्थर

By  Mohd Juber Khan January 1st 2026 01:08 PM

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी ज़िले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां के मोंठ तहसील परिसर में ज़मीन विवाद से परेशान एक महिला किसान ने अपना आपा खो दिया और उपज़िलाधिकारी (SDM) की खड़ी गाड़ी पर पत्थर मारकर उसका शीशा तोड़ दिया। महिला का आरोप है कि वह पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लगा रही है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक़, महिला किसान और उसका पति काफी समय से अपने पुश्तैनी ज़मीन विवाद को लेकर तहसील के चक्कर काट रहे हैं। महिला का कहना है कि विपक्षियों ने उसकी जमीन पर अवैध क़ब्ज़ा कर रखा है और प्रशासन सब कुछ जानकर भी चुप्पी साधे हुए है।

'20 बार आई, पर सिर्फ़ तारीख़ मिली'

घटना के बाद पुलिस कस्टडी में महिला ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उसने आरोप लगाया:

"मैं पिछले कई महीनों में 20 से ज्यादा बार तहसील के चक्कर काट चुकी हूं।"

"हर बार साहब (SDM) या बाबू आश्वासन देकर भेज देते हैं, लेकिन ज़मीन से क़ब्ज़ा नहीं हटवाया जा रहा।"

"आज मेरा धैर्य जवाब दे गया। जब साहब ने फिर से सुनवाई से मना किया, तो मैंने अपनी निराशा में पत्थर उठा लिया।"

तहसील में मचा हड़कंप

जैसे ही पत्थर लगने से एसडीएम की गाड़ी का पिछला शीशा चकनाचूर हुआ, तहसील परिसर में अफ़रा-तफ़री मच गई। सुरक्षाकर्मियों और पुलिस बल ने तुरंत मौके़ पर पहुंचकर महिला और उसके पति को क़ाबू में किया।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

झांसी पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दंपत्ति को हिरासत में ले लिया है।

FIR दर्ज: सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में दंपत्ति पर मुक़दमा दर्ज किया गया है।

अधिकारियों का पक्ष: प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और महिला प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही थी। हालांकि, 20 बार चक्कर काटने के दावे पर प्रशासन ने फ़िलहाल चुप्पी साध रखी है।

उठते सवाल: आख़िर आम जनता कहां जाए?

यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि सिस्टम की विफ़लता का प्रतीक भी है:

शिकायत निवारण में देरी: क्या मुख्यमंत्री के 'संपूर्ण समाधान दिवस' के निर्देशों का पालन ज़मीनी स्तर पर हो रहा है?

ज़मीन विवाद का जाल: ग्रामीण इलाक़ों में ज़मीन विवाद हिंसक रूप क्यों लेते जा रहे हैं?

मानसिक दबाव: न्याय मिलने में देरी एक ग़रीब किसान को क़ानून हाथ में लेने पर मजबूर कर रही है, जो समाज के लिए चिंताजनक है।

फ़िलहाल महिला और उसके पति पुलिस की गिरफ़्त में हैं। इस घटना ने झांसी ज़िला प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ़ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना ग़लत है, वहीं दूसरी ओर एक महिला किसान का 20 बार चक्कर काटने के बाद इस क़दम को उठाना सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

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