"संविधान और लोकतंत्र पर हमला कर रही भाजपा": जवाहर भवन में राहुल गांधी का बड़ा बयान

By  Mohd Juber Khan January 22nd 2026 03:27 PM

नई दिल्ली: दिल्ली के जवाहर भवन में आज 'मनरेगा बचाओ मोर्चा' के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) के स्थान पर लाए गए नए अधिनियम 'विकसित भारत - गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G)' का कड़ा विरोध किया।

राहुल गांधी का संबोधन: "मोदी सरकार पीछे हट जाएगी अगर हम एक हों"

श्रमिकों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर देश को "आज़ादी से पहले के युग" में ले जाने का आरोप लगाया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:

लोकतंत्र और संविधान का मुद्दा: राहुल गांधी ने कहा, "भाजपा चाहती है कि संविधान और लोकतंत्र को ख़त्म कर दिया जाए। वे आजादी से पहले वाला हिंदुस्तान वापस लाना चाहते हैं, जहां एक ही व्यक्ति (राजा) सब कुछ तय करता था।"

नाम और योजना का अधिकार: उन्होंने श्रमिकों से कहा कि वे ही निर्णय लेंगे कि भविष्य में इस योजना का नाम क्या होगा और यह कैसे चलेगी। उन्होंने साफ़ किया कि कांग्रेस की लड़ाई नाम के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों के 'काम के अधिकार' के लिए है।

एकता का संदेश: राहुल गांधी ने हामी भरते हुए कहा कि विपक्ष और श्रमिक वर्ग में एकता की कमी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "अगर हम सब एक साथ हो जाएं, तो ये डरपोक लोग (भाजपा) डर जाएंगे। अगर हम एक होंगे, तो पीएम मोदी पीछे हट जाएंगे और फिर से मनरेगा (पुराने स्वरूप में) चालू हो जाएगा।"

मल्लिकार्जुन खरगे का हमला: "ग़रीबों का हक छीन रही सरकार"

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गांधीवादी मूल्यों और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मनरेगा के फंड में कटौती कर रही है और भुगतान में देरी कर रही है ताकि ग़रीब श्रमिक परेशान होकर इसे छोड़ दें।

प्रतीकात्मक विरोध: 'देशभर की मिट्टी' का संगम

इस सम्मेलन की एक ख़ास बात यह रही कि देशभर से आए हजारों मनरेगा श्रमिकों ने अपने-अपने कार्यस्थलों से एक मुट्ठी मिट्टी साथ लाए थे।

एकता का संदेश: सभी राज्यों से लाई गई इस मिट्टी को एक स्थान पर इकट्ठा किया गया, जो 'राष्ट्रीय एकता' और 'श्रम के सम्मान' का प्रतीक बनी।

मिट्टी का संकल्प: कांग्रेस नेताओं ने इस मिट्टी को साक्षी मानकर संकल्प लिया कि वे मनरेगा को ख़त्म नहीं होने देंगे और इसे बचाने के लिए 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान को गांव-गांव तक ले जाएंगे।

क्या है विवाद की जड़?

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर और उसे 'VB-G RAM G' एक्ट के रूप में पुनर्गठित करके इसके 'क़ानूनी गारंटी' वाले स्वरूप को ख़त्म कर दिया है।

वित्तीय बोझ: अब राज्यों को योजना का 40% खर्च उठाना होगा, जिसे कांग्रेस 'अव्यावहारिक' बता रही है।

शक्तियों का केंद्रीकरण: कांग्रेस का कहना है कि पंचायतों की शक्तियां छीनकर अब दिल्ली और लखनऊ के अधिकारी तय करेंगे कि कहां काम होगा।

बहरहाल राहुल गांधी के इस बयान ने यह साफ़ कर दिया है कि आगामी समय में कांग्रेस मनरेगा और श्रमिकों के अधिकारों को एक बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बनाने जा रही है।

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