राहुल गांधी का इंदौर दौरा: दूषित पानी त्रासदी के पीड़ितों से मिले, सरकार पर साधा निशाना
इंदौर: लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज एक दिवसीय दौरे पर इंदौर पहुंचे। उनका यह दौरा मुख्य रूप से इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण फैली बीमारी (उल्टी-दस्त) और उससे हुई मौतों के पीड़ितों को सांत्वना देने और स्थिति का जायज़ा लेने के लिए था।
बॉम्बे हॉस्पिटल में जाना मरीज़ों का हाल
सुबह लगभग 11 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद राहुल गांधी सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे। यहां उन्होंने आईसीयू और वार्डों में भर्ती उन मरीज़ों से मुलाक़ात की, जिनका इलाज दूषित पानी की वजह से हुए गंभीर संक्रमण के चलते चल रहा है। उन्होंने डॉक्टरों से मरीज़ों की स्थिति की जानकारी ली और पीड़ितों के परिजनों से बात कर उन्हें ढांढस बंधाया। राहुल गांधी ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी है और न्याय के लिए आवाज़ उठाएगी।
भागीरथपुरा: "हर घर में मातम, ग़रीब बेबस"
अस्पताल के बाद राहुल गांधी प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरा पहुंचे। यहां की संकरी गलियों में पैदल चलते हुए उन्होंने उन परिवारों से मुलाक़ात की, जिन्होंने इस त्रासदी में अपनों को खो दिया है।
मृत्तकों के परिजनों से मिलने के बाद उन्होंने तीखे सवाल उठाते हुए कहा:
"भागीरथपुरा में हर घर में मातम है। लोगों ने बार-बार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत की, लेकिन प्रशासन सोता रहा। सीवर का पानी पीने के पाइप में कैसे मिला? यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध है।"
विवादित आंकड़े और राजनीतिक घमासान
इस त्रासदी में मौतों के आंकड़ों को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच बड़ा अंतर है:
कांग्रेस का दावा: प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के अनुसार, अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है।
सरकारी आंकड़ा: प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर अब तक 7 से 15 मौतों की पुष्टि की है।
मेडिकल रिपोर्ट: MGM मेडिकल कॉलेज की ऑडिट कमेटी ने 15 मौतों को संदिग्ध माना है।
प्रमुख मांगें और कार्रवाई
राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि 'स्वच्छ इंदौर' के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है, जबकि ग़रीब बस्तियों में 'धीमा ज़हर' (दूषित पानी) परोसा जा रहा है।
जवाबदेही: ज़िम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर सख़्त कार्रवाई की मांग।
मुआवज़ा: पीड़ितों को उचित आर्थिक सहायता और मुफ़्त इलाज की निरंतरता।
बुनियादी ढांचा: दशकों पुरानी पाइपलाइनों को तुरंत बदलने की मांग।