'वंदे मातरम्' के 150 साल: संसद में महाबहस, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तक़रार
नई दिल्ली: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय संसद के दोनों सदनों – लोकसभा (सोमवार) और राज्यसभा (मंगलवार) – में विशेष चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान, यह ऐतिहासिक गीत देश की आज़ादी के आंदोलन में उसकी भूमिका से हटकर तुष्टीकरण की राजनीति और इतिहास की व्याख्या को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक तीखी वैचारिक जंग का मैदान बन गया।
राज्यसभा: अमित शाह ने छेड़ा 'तुष्टीकरण' का मुद्दा
मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा।
अमित शाह के मुख्य आरोप:
वंदे मातरम् का 'विभाजन': शाह ने आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू ने 1937 में वंदे मातरम् के पूरे गीत को अपनाने के बजाय उसके सिर्फ़ दो अंतरों तक सीमित करने का काम किया। उन्होंने कहा, "वहीं से तुष्टीकरण की शुरुआत हुई, वह तुष्टीकरण जाकर देश के विभाजन में बदला।"
नेहरू पर निशाना: शाह ने कहा कि यदि वंदे मातरम् के दो टुकड़े कर तुष्टीकरण की शुरुआत नहीं हुई होती तो देश का विभाजन भी नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान वंदे मातरम् बोलने वालों को जेल भेज दिया था, जबकि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र था।
राष्ट्रीयता का जागरण: शाह ने वंदे मातरम् को 'भारत के पुनर्जन्म का मंत्र' बताते हुए कहा कि यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा भारत माता की भक्ति, ज्ञान और वीरता की भावना को जगाने के लिए रचा गया था।
खड़गे का पलटवार: 'देशभक्ति हमें न सिखाएं'
गृह मंत्री के आरोपों पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखा पलटवार किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रमुख तर्क:
इतिहास पर सवाल: खड़गे ने भाजपा के वैचारिक पूर्ववर्तियों पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि जब कांग्रेस के नेता 'वंदे मातरम्' का नारा लगाते हुए जेल जा रहे थे, तब उनके (भाजपा/आरएसएस) लोग 'अंग्रेज़ों के लिए काम कर रहे थे'। उन्होंने कहा, "आप हमें देशभक्ति सिखा रहे हैं? आप हमेशा आज़ादी की लड़ाई और देशभक्ति के गानों के ख़िलाफ़ रहे।"
नेहरू को बचाने की कोशिश: खड़गे ने अमित शाह के इस दावे को खारिज किया कि नेहरू ने अकेले यह फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि 1937 में वंदे मातरम् के दो अंतरों को अपनाने का फैसला महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल समेत कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सामूहिक नेतृत्व का था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह को नेहरू और अन्य महान नेताओं का अपमान करने का मौक़ा नहीं छोड़ना चाहिए।
रवीन्द्रनाथ टैगोर का हवाला: खड़गे ने 1937 के फैसले का बचाव करते हुए रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों का हवाला दिया, जिन्होंने सुझाव दिया था कि राष्ट्रीय गीत के रूप में पहले दो छंदों को अलग किया जा सकता है, ताकि सभी समुदायों को यह स्वीकार्य हो।
लोकसभा में PM मोदी ने की थी शुरुआत
इससे पहले, सोमवार को लोकसभा में चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
PM मोदी का आरोप: प्रधानमंत्री मोदी ने भी कांग्रेस पर 1937 में वंदे मातरम् के पूरे गीत को न अपनाकर "वंदे मातरम् के टुकड़े" करने और विभाजन के बीज बोने का आरोप लगाया था।
स्वदेशी आंदोलन से जुड़ाव: उन्होंने इस गीत के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा था कि यह सिर्फ एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वदेशी आंदोलन का एक माध्यम भी बना था।
प्रियंका गांधी भी बहस में शामिल
खबरों के अनुसार, लोकसभा में इस चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने सत्ता पक्ष पर चुनाव और अन्य ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रीय गीत पर बहस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह चर्चा पश्चिम बंगाल चुनाव के मद्देनज़र हो रही है, जहां बंकिम चंद्र चटर्जी का विरासत महत्वपूर्ण है।
इस दो दिवसीय संसदीय बहस ने न केवल 'वंदे मातरम्' की 150 वर्षों की यात्रा का स्मरण कराया, बल्कि राष्ट्रीयता, इतिहास और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच की गहरी दरार को भी उज़ागर कर दिया।