प्रकाश पर्व पर देश नतमस्तक: पीएम मोदी और सीएम योगी ने दी 'सरबंसदानी' को श्रद्धांजलि
नई दिल्ली/लखनऊ: गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 1666 में पटना साहिब में हुआ था। आज उनके प्रकाश पर्व पर देशभर के गुरुद्वारों में विशेष अरदास, कीर्तन और लंगर का आयोजन किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर गुरु साहिब को नमन करते हुए लिखा:
"श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे साहस, करुणा और बलिदान के साक्षात स्वरूप हैं। उनका जीवन और शिक्षाएं हमें सत्य, न्याय और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।"
प्रधानमंत्री ने पटना साहिब की अपनी पुरानी यात्राओं की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि गुरु साहिब का दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और कर्तव्य के मार्ग पर ले जाता रहेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति गहरी आस्था प्रकट की। उन्होंने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि गुरु साहिब का जीवन "धर्म और मानवता की रक्षा का महान अध्याय" है।
वीर बाल दिवस का संदर्भ: सीएम योगी ने हाल ही में मनाए गए 'वीर बाल दिवस' (26 दिसंबर) का स्मरण करते हुए कहा कि साहिबजादों और गुरु परिवार का बलिदान राष्ट्र की स्मृतियों में अमर है।
संगत को बधाई: उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर सिख समाज को प्रकाश पर्व की बधाई देते हुए कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने समाज को एकजुट करने और अत्याचार के खिलाफ लड़ने की शक्ति दी।
विपक्षी नेताओं ने किया नमन
विपक्ष के नेताओं ने भी गुरु साहिब के न्यायप्रिय समाज के सपने को याद किया:
राहुल गांधी: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिखाए गए मानवीय कल्याण और साहस के आदर्श सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
अखिलेश यादव: सपा प्रमुख ने भी गुरु साहिब के प्रकाश पर्व पर शुभकामनाएं देते हुए उनके महान संघर्षों को याद किया।
देशभर में उल्लास का माहौल
पटना साहिब: गुरु साहिब की जन्मस्थली तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में भव्य नगर कीर्तन निकाला गया और आतिशबाजी के बीच विशेष दीवान सजाए गए।
नगर कीर्तन: दिल्ली, अमृतसर और लखनऊ जैसे शहरों में पंज प्यारों के नेतृत्व में विशाल नगर कीर्तन निकाले गए, जहाँ 'गतका' (सिख मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा।
लंगर सेवा: गुरुद्वारों में 'अटूट लंगर' की व्यवस्था की गई, जहाँ हज़ारों श्रद्धालुओं ने बिना किसी भेदभाव के प्रसाद ग्रहण किया।
क्या है इस दिन का ख़ास महत्व?
गुरु गोबिंद सिंह जी ने ही 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी और गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया था। उनका नारा "सवा लाख से एक लड़ाऊं" आज भी करोड़ों लोगों में अदम्य साहस का संचार करता है।