ऐतिहासिक पल: दीपावली अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल
नई दिल्ली: भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण दिन है। रोशनी का महापर्व दीपावली अब आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage of Humanity) की प्रतिनिधि सूची में शामिल हो गया है। यह घोषणा नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान की गई।
दीपावली का यह सम्मिलन भारत की ओर से सूचीबद्ध 16वाँ सांस्कृतिक तत्व है, जो वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं की प्रतिष्ठा को और बढ़ाता है।
भारत की सभ्यता का सार: वैश्विक मान्यता
यूनेस्को के इस निर्णय का देशभर में व्यापक स्वागत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैश्विक मान्यता का स्वागत करते हुए कहा, "दीपावली हमारी संस्कृति और मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है। यह हमारी सभ्यता का सार है। यह रोशनी और नेकी का प्रतीक है। यूनेस्को की सूची में दीपावली का शामिल होना इस त्योहार की दुनिया भर में लोकप्रियता को और बढ़ाएगा।"
अमूर्त विरासत क्या है?
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) वे सांस्कृतिक प्रथाएं, अभिव्यक्तियाँ, ज्ञान और कौशल हैं जिन्हें समुदाय, समूह और व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक पहचान के हिस्से के रूप में पहचानते हैं। यह मूर्त नहीं होती, बल्कि जीवित परंपराओं (Living Traditions) का हिस्सा होती है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती हैं।
उदाहरण: त्योहार, लोक मान्यताएं, कहानी-किस्से, लोकनृत्य, पारंपरिक शिल्प कौशल और अनुष्ठान।
उद्देश्य: यूनेस्को इन विरासतों को संवर्धित और संरक्षित (Preserve) करने के लिए सूचीबद्ध करता है।
दीपावली की महत्ता और नामांकन प्रक्रिया
दीपावली को मानवता की धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारत ने 2024-25 चक्र के लिए अपना विस्तृत नामांकन दस्तावेज़ प्रस्तुत किया था।
सर्व-समावेशी दृष्टिकोण: इस नामांकन प्रक्रिया में संस्कृति मंत्रालय के तहत संगीत नाटक अकादमी ने देश भर के विद्वानों, कलाकारों, कारीगरों, विभिन्न समुदायों (जिनमें आदिवासी समूह और प्रवासी भारतीय भी शामिल हैं) के साथ परामर्श किया।
सामुदायिक सहमति: विभिन्न समुदायों से साक्ष्य और व्यक्तिगत अनुभव एकत्र किए गए ताकि यह पुष्टि हो सके कि दीपावली एक जीवंत, विविध और लचीली परंपरा है, जिसे लाखों लोग श्रद्धा से मनाते हैं।
सामाजिक सद्भाव: दीपावली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, सामुदायिक सहभागिता और आर्थिक सहयोग को मजबूती प्रदान करने वाला एक वृहद सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Cultural Ecosystem) है। यह पर्व कारीगरों (दीये, कलाकृतियाँ) और छोटे व्यापारियों के लिए रोज़ी-रोटी का समर्थन करके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में भी योगदान देता है।
भारत के लिए महत्व
दीपावली के यूनेस्को सूची में शामिल होने से भारत को कई लाभ होंगे:
वैश्विक पहचान: त्योहार को एक वैश्विक मंच मिलेगा, जिससे इसकी अंतर्राष्ट्रीय लोकप्रियता और समझ बढ़ेगी।
पर्यटन को बढ़ावा: इससे सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा।
संरक्षण और प्रचार: केंद्र और राज्य सरकारें इसके संरक्षण और प्रचार के लिए यूनेस्को के समर्थन और वैश्विक दिशानिर्देशों का लाभ उठा सकेंगी।
16वां तत्व: यह भारत का 16वाँ अमूर्त सांस्कृतिक तत्व है, जो देश की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है। इससे पहले, सूची में योग, कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा, रामलीला, वैदिक मंत्रोच्चार जैसे अन्य तत्व शामिल हैं।
जश्न की है तैयारी, जश्न हो!
इस ऐतिहासिक क्षण का जश्न मनाने के लिए, सरकार ने लाल किले समेत देश भर की प्रमुख इमारतों में विशेष दीपोत्सव के आयोजन की योजना बनाई है, जिसमें यूनेस्को सत्र में भाग लेने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह आयोजन दुनिया को भारत की 'प्रकाश की विजय' की परंपरा का अनुभव कराएगा।