संभल हिंसा: ASP अनुज चौधरी समेत पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश

By:  Mohd Juber Khan January 14th 2026 01:34 PM

संभल: संभल की चंदौसी कोर्ट ने 2024 की संभल हिंसा मामले में एक बड़ा फै़सला सुनाया है। दरअसल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने तत्कालीन सर्कल ऑफ़िसर (CO) और वर्तमान ASP अनुज चौधरी, पूर्व कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और क़रीब 12-20 अन्य पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।

24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा ने एक बार फिर क़ानूनी मोड़ ले लिया है। कोर्ट ने उन पुलिस अधिकारियों पर शिकंजा कसा है जो उस दौरान कानून-व्यवस्था संभालने की ज़िम्मेदारी पर तैनात थे।

कोर्ट के आदेश का मुख्य आधार

यह आदेश आलम नामक एक युवक के पिता यामीन द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि:

उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास पापड़ बेच रहा था।

हिंसा के दौरान पुलिस की ओर से की गई फायरिंग में आलम को गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने कथित तौर पर बिना किसी उकसावे के और नियमों को ताक पर रखकर सीधे नागरिकों पर गोलियां चलाईं।

किन-किन पर गिरेगी गाज?

CJM कोर्ट ने विशेष रूप से निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है:

अनुज चौधरी: तत्कालीन CO संभल (वर्तमान में फिरोज़ाबाद में ASP के पद पर तैनात)।

अनुज तोमर: तत्कालीन कोतवाली प्रभारी।

12 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मी: जो उस समय ड्यूटी पर मौजूद थे।

पुलिस प्रशासन का रुख़: हाईकोर्ट में अपील की तैयारी

संभल के वर्तमान SP केके विश्नोई ने इस आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ़ किया है कि पुलिस फ़िलहाल FIR दर्ज नहीं करेगी। प्रशासन का तर्क है कि:

इस मामले में पहले ही एक न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) पूरी की जा चुकी है।

पुलिस का मानना है कि घटना के समय उन्होंने केवल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 'न्यूनतम बल' का प्रयोग किया था।

हाईकोर्ट में चुनौती: प्रशासन इस फैसले के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील करने जा रहा है।

"हम कोर्ट के इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे। इस मामले की जांच पहले से ही उच्च स्तरीय समितियों द्वारा की जा रही है।" — केके विश्नोई, SP संभल

संभल हिंसा का बैकग्राउंड (24 नवंबर 2024)

संभल में हिंसा तब भड़की थी जब स्थानीय कोर्ट के आदेश पर शाही जामा मस्जिद का दोबारा सर्वे करने के लिए एक टीम पहुंची थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें:

कुल मौतें: 5 स्थानीय नागरिकों की जान गई।

घायल: 25 से अधिक पुलिसकर्मी (जिनमें ख़ुद SP केके विश्नोई भी शामिल थे) घायल हुए थे।

गिरफ़्तारी: अब तक इस मामले में 50 से ज्यादा लोगों को जेल भेजा जा चुका है।

आगे क्या होगा?

कोर्ट ने पुलिस को 7 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। हालांकि, पुलिस द्वारा हाईकोर्ट जाने के फैसले से FIR की प्रक्रिया पर फ़िलहाल रोक लग सकती है। अगर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो ASP अनुज चौधरी और उनकी टीम के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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